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Bareilly News: पर्दे में रहे लापरवाही...

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बरेली। मजदूर धनंजय की मौत का जिम्मेदार कौन है? सुरक्षा उपकरणों का इस्तेमाल किए बगैर मजदूर कैसे काम कर रहे थे? निरीक्षणों में अब तक यह खामी क्यों नहीं पकड़ी जा सकी? यह तय करने के स्थान पर अफसरों का पूरा जोर मजदूर की मौत की वजह बनी लापरवाही पर पर्दा डालने में ज्यादा है।
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अफसर यह कह कर पल्ला झाड़ रहे हैं कि सुरक्षा के नियमों का पालन कराना निर्माण कराने वाले ठेकेदार की जिम्मेदारी है, मगर अभी तक कार्रवाई कुछ नहीं की गई है। उधर, श्रमिकों का आरोप है कि इस लापरवाही में अफसर भी कम जिम्मेदार नहीं। मजदूर 20-22 फुट ऊंचे पिलर पर शटरिंग का काम बिना किसी सेफ्टी बेल्ट और हेलमेट के करते हैं। शटरिंग के नीचे किसी तरह का जाल भी नहीं बांधा गया है।
मजदूरों ने बताया कि जाल के लिए उन्होंने कई बार प्रोजेक्ट मैनेजर से कहा भी, लेकिन यह कहकर हड़का दिया गया कि डर लगता है तो कल से मत आओ। मजबूर होकर मजदूरों ने कहना ही बंद कर दिया। सेफ्टी बेल्ट न सही, अगर जाल भी बंधा होता तो धनंजय की जान बच सकती थी।
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मजदूरों का कहना है कि ऐसा पहली बार नहीं हुआ है। इससे पहले भी जिला अस्पताल के सामने एक स्लैब सड़क पर आकर गिरी थी। तब कई राहगीर बच गए थे। यदि किसी के ऊपर गिर जाती तो बड़ा हादसा हाे जाता। पहले हुए हादसों के बाद भी अधिकारी नहीं चेत रहे हैं। निरीक्षण के नाम पर सिर्फ खानापूरी करने आते हैं। ठेकेदार कंपनी के लोगों से मिलकर चले जाते हैं।

सेतु निगम के महाप्रबंधक केएन ओझा का दावा है कि जब-जब निरीक्षण किया, हर बार टोका। उनके सामने मजदूर हेलमेट और सेफ्टी बेल्ट लगा लेते हैं लेकिन हर समय हेलमेट व बेल्ट नहीं लगाते। अब कार्यदायी संस्था और सेतु निगम के साइट इंजीनियरों से पूरी रिपोर्ट लेंगे। इसके बाद ही किसी तरह का निर्णय ले सकेंगे।




हादसे के बाद मजदूरों ने रोक दिया काम
धनंजय की मौत के बाद से मजदूरों ने काम रोक दिया था। सोमवार रात एक बजे तक काम शुरू नहीं हो सका। मजदूरों में कोई विरोध भी नहीं कर रहा है मगर काम भी नहीं कर रहा है। माना जा रहा है कि मजदूर ठेकेदार कंपनी की लापरवाही और अफसरों की अनदेखी के बीच काम करने के लिए मजबूर हैं। विरोध करने पर उनसे काम छीना जा सकता है।




खतरा सिर पर, अब भी नहीं चेते
कुतुबखाना पुल के निर्माण के लिए जहां-जहां स्लैब पड़नी होती है वहां पर लोहे के स्ट्रक्चर पर शटरिंग लगाई जाती है। शटरिंग के नीचे और अगल-बगल से लोग दिन भर गुजरते रहते हैं। निर्माण सामग्री जमीन पर है और सिर पर शटरिंग गिरने का खतरा रहता है। इससे पहले 18 जुलाई को शटरिंग गिरी भी थी, लेकिन तब लोग बच गए थे। अब एक मजदूर की मौत हुई है। खतरा पर सिर पर है मगर जिम्मेदार अब भी नहीं चेत रहे। हादसा होने के बाद सोमवार को भी लोग पूरे दिन उसी पिलर के नीचे से गुजरते रहे। स्कूली बच्चे भी वहीं से निकलते रहे। सेतु निगम ने मौके के हालात से नगर आयुक्त को भी अवगत कराया है। इसमें कहा गया है कि जिस जगह पर शटरिंग है और वहां उसके गिरने का खतरा है।







कार्यस्थल के पास के दुकानदारों की पीड़ा
घोर लापरवाही के साथ काम हो रहा है। सुरक्षा के लिए एक जाल बंधा होना चाहिए। ठेकेदार कंपनी ने यह जरूरत ही नहीं समझी। अक्सर काम करते हुए नीचे और सड़क के किनारे की ओर लोहे की छोटी बड़ी राॅड गिरती रहती हैं। दुकानदार तो कई बार विरोध कर चुके हैं। निरीक्षण करने वाले अफसरों को भी बता चुके हैं, मगर सुनवाई तो आज तक नहीं हुई है। -मोहम्मद अयूब खान, दुकानदार




यह हादसा अफसरों की ढिलाई का नतीजा है। न तो मजदूरों की सुरक्षा का ध्यान रखा जा रहा है न ही निर्माण स्थल के पास से गुजरती जनता का। मजदूर हेलमेट तक नहीं लगाए होते। अफसर निरीक्षण में पता नहीं क्या देखकर चले जाते हैं? कल को किसी दुकानदार या राहगीर के साथ भी हादसा हो सकता है। यह सुधरने वाले नहीं है। -परमजीत सिंह, दुकानदार

वर्जन
सेफ्टी के नियमों का पालन कराने की पहली जिम्मेदारी निजी फर्म (ठेकेदार) की है। स्मार्ट सिटी व सेतु निगम के अभियंताओं को नियमों का पालन सुनिश्चित कराना है। अगर फर्म ने सुरक्षा नियमों का पालन नहीं कराया तो यह जांच का विषय है। सेतु निगम से प्रारंभिक आख्या लेने के बाद स्मार्ट सिटी लिमिटेड की सीईओ के सामने रखेंगे। -संजय कुमार तिवारी, महाप्रबंधक स्मार्ट सिटी लिमिटेड
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