कैंट बोर्ड ने राज्य सरकार से राजस्व में हिस्सदारी मांगी है। इसके लिए सीईओ की ओर से जिला प्रशासन व संबंधित विभागों को प्रत्यावेदन भेजा गया है। इस हिस्सेदारी से कैंट बोर्ड के खाते में लाखों रुपये आऐंगे। यह व्यवस्था दिल्ली और सिकंदराबाद में भी लागू है।
राज्य वित्त आयोग से राज्य सरकार को प्राप्त होने वाले कर राजस्व में से कैंट बोर्ड को भी हिस्सेदारी दिए जाने के लिए जिला प्रशासन को प्रत्यावेदन दिया गया है। इसमें दिल्ली व सिकंदराबाद कैंट बोर्ड को राज्य सरकार से मिलने वाली हिस्सेदारी का उल्लेख भी किया है। दिल्ली में तो राज्य सरकार को मिलने वाले राजस्व का .07 प्रतिशत कैंट बोर्ड को मिल रहा है।
यह दावा कैंट बोर्ड के सीईओ प्रमोद कुमार सिंह ने कैंट बोर्ड अधिनियम के तहत किया है। कैंट बोर्ड अधिनियम 2006 के सेक्शन 10 बी एवं भारतीय संविधान की धारा 243 पी के अनुरूप कैंट बोर्ड म्युनिसिपलिटी के समतुल्य है। इसके आधार पर कैंट बोर्ड को ग्रांट एवं रेवेन्यू शेयरिंग का अधिकार है। इसके अलावा म्युनिसिपल टैक्सेशन एक्ट 1881 के अनुसार देय है। उनका कहना है कि हमारे कर्मचारी प्रदेश सरकार को तमाम टैक्स देते हैं। इस लिहाज से बोर्ड को अपनी ओर से प्रत्यावेदन करना चाहिए।