सिंचाई मंत्री धर्मपाल सिंह ने कहा कि बरेली की नहरों और नदियों की जमीन पर अवैध कब्जे हो गए हैं। कालोनियां बनने की जानकारी मिली है। जिसे गंभीरता से लिया जाएगा, जमीन की पैमाइश होगी। अवैध कब्जे की पुष्टि होने पर नोटिस जारी करके बेदखली की कार्रवाई की जाएगी।
सर्किट हाउस में सिंचाई मंत्री ने यह जानकारी पत्रकारों के सवालों के जवाब में दी। नहर की जमीन पर अवैध कब्जे की पुष्टि हुई तो उसे मुक्त भी कराएंगे। इस समय नहर और नदियों की खाली जमीन पर वृक्षारोपण होगा, ताकि भविष्य में उस जमीन पर लोग कब्जा न कर सकें। उन्होंने कहा कि वर्षा जल रोकने को दूसरी नदियों और नहरों में समाहित करने की योजना तैयार कर ली गई है। जिस पर अभी से लागू कर दिया है। बरेली की राम गंगा को बदायूं जिले की नहरों से जोड़ने की योजना विचाराधीन है। इसी तरह सरयू नदी को बहराइच, श्रावस्ती, बलरामपुर, बस्ती जिलों की छोटी नदी और नहरों से जोड़ने की व्यवस्था की जा रही है।
सिंचाई मंत्री ने कहा कि वाण सागर नदी को मध्य क्षेत्र के जिलों की नहरों। अर्जुन सहाय दी को हमीरपुर और महोबा तथा मध्य क्षेत्र की नदियों को पश्चिमी यूपी के जिलों की नहर से जोड़ने की योजना है। राम गंगा नदी के बदायूं की 15 किलोमीटर लंबी नहरों से जुड़ने पर 53.504 हेक्टेयर क्षेत्रफल में सिंचाई हो सकेगी।
उन्होंने कहा कि गोमती रिवर रिफंड योजना में अफसरों की उदासीनता के कारण इस पर 900 करोड़ रुपये ज्यादा खर्च हो रहे हैं। इसमें भी 300 करोड़ रुपये की फिजूलखर्ची को रोका गया है। अब इसके लिए 600 करोड़ रुपये और खर्च किए जाएंगे। गोमती नदी में दो महीने के अंदर यानी कि मई 2017 तक शारदा नदी का पानी छोड़ा जाएगा, इसमें छोटे बड़े 28 नालों के गिरने वाले पानी को तत्काल प्रभाव से रोकने के निर्देश दिए हैं। जिससे कि लखनऊ के लोग इस पानी का आचमन कर सकें। पूर्व सरकार ने इसमें वाकिंग, साइकिल तथा जोगिंग ट्रैक और ग्रीनरी के नाम पर 187 करोड़ रुपयों का दुरुपयोग किया है। अतिरिक्त बजट में 72 करोड़ से अतिर्कि जमीन का अर्जन, स्ट्रीट लाइट, वाटर बस, फ्लोटिंग फाउंडेशन, आदि पर होने वाले अपव्यय को रोक दिया है।