Can not find bandmintin Pair like ponappa and gutta
- फोटो : बरेली, अमर उजाला
शटलर अश्विनी पोनप्पा और ज्वाला गुट्टा जैसी महिला जोड़ी का कोई जोड़ नहीं। एक साथ प्रैक्टिस करने वाली जोड़ी ओलंपिक तक पहुंची, लेकिन बैडमिंटन में महिला जोड़ियों का जैसे अकाल दिख रहा है। पिछले दिनों बरेली में हुई पांच दिवसीय ऑल इंडिया सीनियर रैंकिंग बैडमिंटन प्राइजमनी टूर्नामेंट में 700 शटलर ने देश भर से भाग लिया। सौ से अधिक टीमें पुरुष युगल व मिश्रित युगल में बनीं। महिला युगल की जोड़ी सिर्फ 38 पर ही ठहर गई।
डिस्ट्रिक्ट बैडमिंटन एसोसिएशन की ओर से डोरी लाल अग्रवाल स्पोर्ट्स स्टेडियम में एक दिन में 50 से अधिक मैच हुए। सबसे ज्यादा मुकाबले पुरुष एकल और महिला एकल में खेले गए। इसमें 500 से अधिक शटलरों ने भाग लिया। युगल मुकाबलाें के लिए पुुरुष युगल की टीमें अधिक रहीं। इसमें 155 टीमें आईं। वहीं मिश्रित युगल में 86 टीमों ने अपना पंजीकरण कराया। इनके मुकाबले महिला युगल की केवल 38 टीमें ही इसमें आईं। यूपी से जहां पुरुष युगल में 15, मिश्रित युगल में 10 टीमें शामिल हुईं, वहीं महिला युगल से सिर्फ पांच टीमों ने भाग लिया।
बेस्ट जोड़ी चाहता है हर शटलर
सहारनपुर की शटलर शालिनी चौधरी कहती हैं कि महिला युगल के लिए जोड़ी न बन पाने में सबसे ज्यादा दिक्कत खिलाड़ियों का एक ही जगह पर न रहना है। आज कोई यहां प्रैक्टिस कर रहा है तो दूसरा किसी और शहर में। ऐसे में नियमित जोड़ी नहीं बन पाती। अगर एकेडमी में हो तो आसानी रहती है। शटलर सारा नकवी कहती हैं कि हर प्लेयर चाहता है कि उसका पार्टनर भी खेलने में बेस्ट हो। ऐसे में जोड़ी बनाने में अधिकतर शटलर कतराते हैं।
टूर्नामेंट में शटलर- 700
पुरुष एकल- 300
पुरुष युगल- 155
महिला एकल- 300
महिला युगल- 38
मिश्रित युगल- 85
बैडमिंटन में इस बार पिछले साल के मुकाबले अधिक शटलर आए, लेकिन महिला युगल की कमी रही। हर खिलाड़ी चाहता है कि उसका पार्टनर भी अच्छा खेलने वाला हो, जब खिलाड़ी नहीं मिल पाते तो सिंगल ही खेलते हैं।
- अनिल मेहरोत्रा, सचिव, डिस्ट्रिक्ट बैडमिंटन एसोसिएशन