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Bareilly News: सीएआरआई में बन सकता है केज फ्री अंडा उत्पादन प्रशिक्षण केंद्र, शोध में जुटे वैज्ञानिक

Fri, 22 Nov 2024 03:50 PM IST
मुकेश कुमार अमर उजाला ब्यूरो, बरेली

सार

केज फ्री मॉडल के तहत जालीदार बाड़े में मुर्गी पालन किया जाता है। इससे उनको प्राकृतिक आवास का अहसास होता है। इससे चारे का खर्च भी बचता है और अंडे भी गुणवत्तायुक्त होते हैं। 
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सांकेतिक तस्वीर - फोटो : freepic
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विस्तार
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केज फ्री अंडा उत्पादन मॉडल के विकास में जुटे वैज्ञानिकों को प्रदेश सरकार के साथ हुए करार के बाद अब संसाधनों की कमी नहीं होगी। साथ ही, केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (सीएआरआई) इज्जतनगर में प्रदेश का पहला प्रशिक्षण केंद्र बनाए जाने की उम्मीद भी जगी है। चार माह पूर्व ही इसका प्रस्ताव केंद्रीय पशुपालन एवं डेयरी मंत्रालय को भेजा गया था। अब इस पर सकारात्मक जवाब मिलने के आसार हैं।

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सीएआरआई के निदेशक डॉ. एके तिवारी के मुताबिक बुधवार को प्रदेश सरकार, पीपुल फॉर एनिमल्स पब्लिक पॉलिसी फाउंडेशन (पीएफए पीपीएफ) के बीच करार हुआ है। मुर्गियों के लिए केज फ्री अंडा उत्पादन मॉडल विकसित करने की कवायद बीते वर्ष ही शुरू हो गई थी, पर जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर और अन्य संसाधनों के लिए बजट के अभाव में कार्य प्रभावित रहा। 

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संस्थान में प्रशिक्षण केंद्र बनाने के लिए भूमि उपलब्ध है। वैज्ञानिक मॉडल विकसित करने के लिए पहले से शोध में जुटे हैं। संस्थान में मुर्गियों के पालन, इलाज, पोषण, नैदानिकी, डायग्नोस्टिक आदि उपलब्ध हैं। विविध कुक्कुट प्रजातियां भी हैं। यहां केंद्र का निर्माण होने से प्रशिक्षणार्थियों को बेहतर प्रशिक्षण मिलेगा।

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इंडोनेशिया दौरे पर आया था विचार
निदेशक डॉ. तिवारी के मुताबिक बीते वर्ष वह वैज्ञानिकों की टीम के साथ इंडोनेशिया गए थे। वहां केज फ्री मॉडल के तहत जालीदार बाड़े में कुक्कुट पालन किया जाता है। इससे उनको प्राकृतिक आवास का अहसास होता है। सूर्य की रोशनी भरपूर आती है। चारा का खर्च भी 40 फीसदी तक बचता है। गुणवत्तायुक्त अंडे की कीमत पांच रुपये तक बढ़ जाती है।

प्राकृतिक आवास छिनने से कुक्कुट को होती हैं दिक्कतें
वैज्ञानिक डॉ. जयदीप रोकड़े के मुताबिक पिंजरे में पलने से कुक्कुट को थर्मल डिस्कंफर्ट, एनर्जी डिप्लेशन व अन्य दिक्कतें होती हैं। उनका विकास धीमा होता है। ब्रूसेस, हैमरेज, एसिड असंतुलन, इलेक्ट्रोलाइट संबंधी बदलाव होते हैं। इसका असर अंडों पर भी होता है। वहीं, पिंजरे के खांचों की बनावट और वेंटिलेशन आदि व्यवस्थित न होने से मांस की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।
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