इंडोनेशिया दौरे पर आया था विचार
निदेशक डॉ. तिवारी के मुताबिक बीते वर्ष वह वैज्ञानिकों की टीम के साथ इंडोनेशिया गए थे। वहां केज फ्री मॉडल के तहत जालीदार बाड़े में कुक्कुट पालन किया जाता है। इससे उनको प्राकृतिक आवास का अहसास होता है। सूर्य की रोशनी भरपूर आती है। चारा का खर्च भी 40 फीसदी तक बचता है। गुणवत्तायुक्त अंडे की कीमत पांच रुपये तक बढ़ जाती है।
प्राकृतिक आवास छिनने से कुक्कुट को होती हैं दिक्कतें
वैज्ञानिक डॉ. जयदीप रोकड़े के मुताबिक पिंजरे में पलने से कुक्कुट को थर्मल डिस्कंफर्ट, एनर्जी डिप्लेशन व अन्य दिक्कतें होती हैं। उनका विकास धीमा होता है। ब्रूसेस, हैमरेज, एसिड असंतुलन, इलेक्ट्रोलाइट संबंधी बदलाव होते हैं। इसका असर अंडों पर भी होता है। वहीं, पिंजरे के खांचों की बनावट और वेंटिलेशन आदि व्यवस्थित न होने से मांस की गुणवत्ता भी प्रभावित होती है।