बुधवार का दिन शहर के पैरेंट्स के लिए आशा और आशंकाओं से भरा रहा। अखबार में स्कूलों की मनमानी पर अंकुश के लिए लाए गए अध्यादेश के बारे में पढ़कर पैरेंट्स को आस बंधी। उन्होंने अपने बच्चों की सालाना फीस का गणित लगाया और अब कैबिनेट के निर्णय के बाद वे निर्धारित से अधिक ली गई फीस वापस करने की मांग स्कूलों से कर रहे हैं। दूसरी तरफ, निजी स्कूलों की एसोसिएशन ने पैरेंट्स के विरोध को दबाने के लिए सात तारीख को हड़ताल की घोषणा कर दी है। इस बीच अमर उजाला के पास हेल्पलाइन नंबर पर कुल 84 कॉल आई। अधिकतर पैरेंट्स का बस यही सवाल था कि अध्यादेश इस सेशन से लागू होना है तो डीएम साहब स्कूल ने ली अधिक फीस किस तरह वापस करवाएंगे।
अध्यादेश में मनाही के बावजूद कई स्कूलों में खुलेआम बिक रहीं किताबें
एक इंटरनेशनल स्कूल में हर साल की तरह इस साल भी अपने नाम की प्रिंटेड कॉपियां बेची जा रही हैं। मॉडल टाउन निवासी अभिभावक ने हेल्पलाइन पर बताया कि 17950 रुपये की पहली तिमाही जमा करने की रसीद दिखाने पर स्कूल से कॉपियों का सेट दिया जाएगा। हर साल स्कूल वाले किताबें आथराइज सेलर से खरीदवाते हैं और कॉपियां स्कूल में बिकती हैं। यूनिवर्सिटी रोड स्थित एक पब्लिक स्कूल में कक्षा नौ में एनसीईआरटी की किताबें खरीदवाई हैं पर निजी प्रकाशक की चार विषय की किताबें स्कूल में बेची जा रही हैं। बिहारीपुर की एक महिला ने फोन करके बताया कि पूरा एनसीईआरटी का सिलेबस 1100 रुपये का मिल गया है, अब कंप्यूटर समेत चार विषयों की किताबें 1200 रुपये में स्कूल से ही खरीदने का बाध्य कर रहे हैं।
री-एडमिशन बताकर ऐंठ रहे प्रमोट हुए स्टूडेंट्स से मोटी फीस
हेल्पलाइन पर सबसे ज्यादा शिकायतें यह आईं हैं कि अपने प्रमोट हुए बच्चे की फीस पूछने वे स्कूल पहुंचे तो तिमाही के साथ ही रीएडमिशन की मोटी रकम बता दी गई। हालांकि रसीद में इस मद को वार्षिक फीस के तहत दिखाया गया है। स्कूलों में इस मद में दस हजार रुपये तक लिए जा रहे हैं, साथ ही उन्हें पहली तिमाही भी जमा करनी है। अगली कक्षा में प्रमोट हुए बच्चों के पेरेंट्स ने फोन पर कहा कि यह फीस न्यू एडमिशन की फीस के बराबर है। साथ ही उन्हें रीएडमिशन के नाम पर गुमराह भी किया जा रहा है। पर बच्चों का भविष्य देखते हुए खुलकर नहीं बोल पा रहे।
डीएम को मेल और ट्वीट किया तब भी बोले लिखकर दो
चंद्रशेखर आजाद नगर से एक पैरेंट ने हेल्पलाइन पर बताया कि 31 मार्च को उन्होंने डीएम के सीयूजी पर फोन किया। उन्हें बताया कि आपके ट्वीटर हैंडिल पर ट्वीट करके स्कूल की फीस और महंगी किताबों की शिकायत की है, एक्शन लीजिए। पैरेंट का आरोप है कि डीएम ने उनसे कहा कि लिखित शिकायत पर ही जांच कराकर कार्रवाई करेंगे। उन्होंने ईमेल करने की बात कही तो भी नहीं माने। पैरेंट ने बेबसी से कहा कि अब लिखित में देकर क्या अपने बच्चे को टारगेट करवाऊं। जिला पंचायत के पास की एक विधवा महिला ने फोन पर कहा कि सिलाई करके वह किसी तरह बेटियों को पढ़ा रही हैं। स्कूल ने फीस दोगुनी कर दी हैं। उन्होंने नाम कटवाने का सोचा तो टीसी नहीं मिली। इसकी लिखित शिकायत उन्होंने डीएम से की, जांच नगर शिक्षा अधिकारी को दी गई पर आज तक कार्रवाई नहीं हुई है।
फीस रिफंड की बात पर भड़के स्कूल वाले
अध्यादेश पढ़कर कई पैरेंट्स अपने बच्चों के स्कूल में यह पूछताछ करने पहुंचे कि उनसे ली गई बीस हजार से अधिक फीस कब वापस होगी। इस पर स्कूल वाले भड़क गए, दो पैरेंट्स ने फोन करके बताया कि इस बात पर प्रबंधन से उनकी नोकझोंक भी हुई। संजयनगर स्थित एक बड़े स्कूल में बच्चे को पढ़ा रहे वहीं के निवासी पैरेंट ने कहा कि कक्षा चार में बेटे की सालाना फीस 26 हजार थी जो इस साल बढ़ाकर 32 हजार कर दी गई है। वह खबर पढ़कर स्कूल गए और फीस वापसी के बारे में पूछा तो स्कूल प्रबंधन ने कहा कि बीस हजार रुपये में स्कूल नहीं चल सकता, वह चाहे तो बच्चे का नाम कटवा लें। हवाई अड्डा निवासी एक अन्य पैरेंट ने बताया कि सप्ताह भर पहले ही दोहना रोड के मिशनरी स्कूल में एडमिशन कराया है। वह अध्यादेश के बाद फीस संशोधन पूछने गए तो सही जवाब दिए बिना लौटा दिया गया।
शनिवार को बोर्ड एग्जाम के दिन हड़ताल पर पब्लिक स्कूल
सात अप्रैल को बोर्ड परीक्षा के दिन शहर के 35 पब्लिक स्कूल हड़ताल करके अपना विरोध जताएंगे। पैरेंट्स जहां अध्यादेश के बाद स्कूलों से फीस वापसी की मांग कर रहे हैं वहीं स्कूलों के संगठन इंडिपेंडेंट स्कूल एसोसिएशन ने यह निर्णय किया है। बुधवार को इस संबंध में गोपनीय ढंग से बैठक की गई, हालांकि अमर उजाला को इसकी सूचना लग गई थी। हमने पहले ही प्रकाशित किया था कि स्कूल हड़ताल कर सकते हैं। एसोसिएशन के अध्यक्ष पारुष अरोड़ा का कहना है नेशनल इंडिपेंडेंट स्कूल एलाइंस सात को दिल्ली के रामलीला मैदान पर धरना दे रहा है। इस संगठन के आह्वान पर ही स्थानीय एसोसिएशन हड़ुताल करेगी। संगठन का एक दल दिल्ली जाकर धरने में शामिल होगा। पारुष अरोड़ा यह भी कहते हैं कि हड़ताल भले परीक्षा के दिन हो रही हो पर इससे बोर्ड परीक्षा देने वाले स्टूडेंट को कोई परेशानी नहीं होगी। परीक्षाएं विधिवत कराई जाएंगी।
अभिभावकों के अधिकार
1. सत्र 2018-19 से लागू अध्यादेश के तहत दुकान विशेष से किताबें और यूनिफार्म खरीदने को स्कूल बाध्य नहीं कर सकेंगे।
2. स्कूल वार्षिक फीस में 5 प्रतिशत से अधिक वृद्धि नहीं कर सकेंगे। अन्य मदों को मिलाकर भी अधिकतम वृद्धि 7-8 प्रतिशत ही होगी।
3. सभी स्कूलों को 12वीं तक की कक्षाओं की कक्षावार फीस का स्ट्रक्चर वेबसाइट पर प्रदर्शित करना होगा।
4. फीस वृद्धि की स्थिति में स्कूल को 60 दिन पहले यह जानकारी नोटिस बोर्ड और वेबसाइट पर देनी होगी।
5. पंजीकरण, प्रवेश, परीक्षा और संयुक्त वार्षिक शुल्क के अतिरिक्त अन्य मद वैकल्पिक रहेंगे। बस, बोर्डिंग, डाइनिंग, शैक्षणिक भ्रमण, मेस की मद में शुल्क अभिभावक तब ही दें जब बच्चा यह सेवाएं प्रयोग करे।