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कृषि का बिजनेस मॉडल युवाओं के लिए बनेगा रोजगार का साधन

Thu, 06 Apr 2017 01:49 AM IST
बरेली
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आईवीआरआई में किसानों की आय दोगुनी करने को लेकर हुई बैठक में कृषि से जुड़े व्यवसायों को बढ़ावा देने पर भी काफी मंथन हुआ। वैज्ञानिकों ने किसानों की आय बढ़ाने का यह सबसे बेहतर करीका बताया और मॉडल भी प्रस्तुत किए। वैज्ञानिकों ने युवाओं पर फोकस किया। कहा कि इनको कृषि से जुड़े व्यवसाय से जोड़ा जाए। इसके लिए कृषि का एक बिजनेस मॉडल तैयार किया जाएगा ताकि खेती युवाओं को बिजनेस की तरह लगे। जिन युवाओं को रोजगार नहीं मिल पाता वह इन बिजनेस में आएं। इसके लिए कृषि से जुड़े व्यवसाय जैसे कृषि उत्पादों को खुद बेचना, उनकी मार्केटिंग, प्रस्तुत करने का तरीका, मैनेजमेंट, खेती के लिए कुछ इनोवेट करना शामिल है। इसके अलावा पशु पालन, मुर्गी पालन, मत्स्य पालन, सब्जी उत्पादन करना भी शामिल है। इसके लिए युवाओं को प्रशिक्षण, स्किल डेवलपमेंट और कृषि उत्पादों को सोशल मीडिया के जरिये प्रचार करने का तरीका सिखाया जाएगा। इसके लिए मॉडल तैयार किया जाएगा। किसानों को भी प्रशिक्षण करने का एक माडर्न खाका तैयार किया जा रहा है। 
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कृषि उत्पाद से तैयार करो चीजें 
किसानों की बदहाली का सबसे बड़ा कारण है कि उनकी फसलों का सही दाम न मिल पाना। सरकारी दाम पाने के लिए किसान दरदर की ठोकरें खाता है। बैठक में इस मुद्दे ने खूब जोर पकड़ा। आय बढ़ानी है तो किसानों को अपने कृषि उत्पादों से चीजें बनानी होंगी और खुद उनको सीधे उपभोक्ताओं तक पहुंचाना होगा। प्रोजेक्ट में इस मुद्दे को प्रमुखता से शामिल किया गया। अगर गन्ने का सही दाम नहीं मिला तो भूरे रंग की चीनी बनाकर बेची जा सकती है।

एकजुटता ही हर समस्या का समाधान
मंथन के दौरान यह बात भी सामने आई कृषि का विकास एकजुटता और साहूमिक रूप से हो सकता है। गो संवर्धन केंद्र बनाने पर चर्चा हुई और इसकी जिम्मेदारी किसानों को ही सौंपी जाए। हर गांव में एक किसान को किसी एक चीज का प्रशिक्षण दिया जाए और उसके जरिये गांव के अन्य किसानों को प्रशिक्षित किया जाए।
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प्रदेश में चालीस फीसदी में गन्ने की खेती
प्रदेश में चालीस फीसदी खेती गन्ने की होती है। उसके बावजूद गन्ना किसान परेशान रहता है। चीनी मिलों के अलावा गन्ने से सिरका, गुड़, भूरे रंग की चीनी बनाई जा सकती है। इसका पैसा भी अच्छा मिल सकता है। कमेटी के अध्यक्ष प्रोफेसर अरविंद्र कुमार ने बताया कि देश में इस बार 270 मिलियन से ज्यादा खाद्यान्न पैदा होेने की उम्मीद है। दलहन का उत्पादन तीन मिलियन तक बढ़ने की उम्मीद है।

 गुड़ बनाने वाले प्लांट का पंजीकरण अनिवार्य होगा
गुड़ बनाने वाले कोल्हू का पंजीकरण अनिवार्य किया जाएगा। भूरे रंग की चीनी बनाने को बढ़ावा दिया जाएगा। साथ ही उसके फायदे भी गिनाएं जाएंगे। कोल्हू के लिए मानक तय किए जाएंगे और उसी अनुसार उनका संचालन होगा।

क्रास ब्रीडिंग की जगह देसी गाय पालन पर जोर
आईवीआरआई के निर्देशक डॉ. आरके सिंह ने बताया कि क्रास ब्रीडिंग किसान देसी गाय पालन पर फोकस कर रहे हैं। रिपोर्ट में भी कामधेनु योजना पर जोर दिया गया है। किसानों के लिए इसकी उपलब्धता सुनिश्चित की जाएगी। पशुओं की कुछ नई नस्ल के लिए आईआईटी दिल्ली और पंडित दीन दयाल उपाध्याय यूनिवर्सिटी व कुछ अन्य संस्थानों के सहयोग एक प्रोजेक्ट पर कार्य भी चल रहा है। 
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इन बिंदुओं होगा कार्य 
-उन्नति बीज तैयार कराए जाएंगे और बीज बैंक बनाए जाएंगे।
-सब्जियों के बीज महंगे हैं रिसर्च संस्थानों में बीजों पर शोध बढ़ाया जाएगा। इसके लिए किसानों का सहयोग लिया जाएगा।
-सस्ते दामों में किसानों को बीच उपलब्ध कराए जाएंगे।
-किसानों के इनोवेशन का उपयोग खेती में कराया जाएगा।
-गन्ना खेती को बढ़ावा के लिए मिलों माडर्न किया जाएगा। गुजरात मॉडल की तर्ज पर खेतों से गन्ना मिलें लेंगी। 
-कोल्ट स्टोरेज बढ़ाए जाएंगे।
-एग्रो प्रोसेसिंग यूनिट लगाए जाएं।
-सोलर बायोगेस प्लांट को बढ़ावा, किसानों को प्रशिक्षित किया जाएगा।
-सिंचाई के साधन बढ़ाना। नहरें और तालाब और जल संरक्षण को बढ़ावा।
-मधुमक्कखी पालन को बढ़ावा। 
-कृषक मॉडल बनाए जाएंगे।
-पशु पालन, मत्स्य पालन, मुर्गी पालन पर जोर।
-आदर्श गांव बनाए जाएंगे।
-कृषि उन्नत शिक्षा प्रोग्राम चलाए जाएंगे।
- किसानों में मोबाइल टेक्नोलॉजी और सोशल मीडिया के प्रयोग को बढ़ावा।
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