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पड़ी कोरोना की मार तो बदल दिया कारोबार

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लॉकडाउन के चलते कई कारोबारियों ने सब्जी बेचना शुरू कर दिया है। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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बरेली। लॉकडाउन में काम-धंधे बंद हुए तो ज्यादातर लोग वक्त बदलने का इंतजार करते हुए घरों में बैठ गए लेकिन कुछ लोगों ने मायूसी भरा यह इंतजार करने के बजाय हौसला दिखाते हुए नए रास्ते तलाश कर लिए और हालात को ही अपने माफिक ढाल लिया। मॉडल टाउन के कुलवंत ने लॉकडाउन में कपड़ों के अपने पुराने कारोबार का वजूद खतरे में देखा तो लोकलाज की परवाह किए बगैर सब्जी की मोबाइल शॉप शुरू कर दी। कई और लोगों ने बदले हालात में खुद को ढलकर ऐसी ही मिसाल कायम की। पुरानी दुकानों पर फिर पहले की तरह भीड़भाड़ इकट्ठी होने की तमन्ना छोड़कर ये लोग अब होम डिलीवरी कर रहे हैं। अमर उजाला की एक रिपोर्ट-
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25 साल से कपड़े के कारोबारी थे,अब सब्जी बेचते हैं कुलवंत
मॉडल टाउन में रहने वाले कुलवंत सिंह 25 साल से कपड़े का कारोबार कर रहे थे। दूरदराज के बाजारों में जाकर चादर और पर्दे बेचने का उनका धंधा आराम से चल रहा था। लॉकडाउन के बाद महीना भर घर में खाली बैठे। छह लोगों का परिवार चलाने के लिए जब जमापूंजी खर्च होने की नौबत आने लगी तो कुलवंत ने सब्जी बेचने का फैसला लिया। अब बीस अप्रैल से वह मॉडल टाउन में ही सब्जी बेचने का धंधा कर रहे हैं। कुलवंत के मुताबिक रोड करीब चार हजार की सब्जी बिक जाती है जिससे करीब छह सौ रुपये की दिहाड़ी बच जाती है। अमर उजाला से बातचीत में कुलवंत ने कहा कि कोई काम छोटा बड़ा नहीं होता। बुरे वक्त में तो यार रिश्तेदार सब छोड़ जाते हैं। अपना परिवार और पैसा ही काम आता है। ईमानदारी और मेहनत बड़ी चीज है। गलत काम से बचना चाहिए।
सेठी ने मोबाइल पर शुरू की बेकरी की दुकान, दो घंटे में पूरे दिन का कारोबार
कुतुबखाना से चौपुला की ओर जाने वाली सड़क पर बेकरी चलाने वाले विजय सेठी ने भी माहौल को बदलते देखा तो अपने काम का तरीका बदल दिया। कुछ दिनों पहले उन्होंने जानने वाले सभी लोगों में अपना मोबाइल नंबर साझा किया और अब बर्थ डे और दूसरे कार्यक्रमों के लिए मोबाइल पर ही ऑर्डर बुक करके घर पर डिलीवरी कर रहे हैं। सेठी ने बताया कि वह सुबह साढ़े सात से नौ बजे के बीच बेकरी खोलते हैं। इसी बीच केक और डेयरी से जुड़े दूसरे उत्पादों को सामाजिक दूरी का ख्याल रखते हुए सप्लाई करते हैं। डेढ़ घंटे बाद बेकरी बंद करके घर निकल जाते हैं। सेठी का कहना है कि इस बहाने उनका धंधा चल रहा है और पुराने ग्राहकों से संबंध भी बना हुआ है।
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लॉकडाउन में गुरुदयाल का किराना स्टोर भी अब फोन पर उपलब्ध
मॉडल टाउन में ही गुरुदयाल सिंह की घर के बाहरी हिस्से में किराना और रोजमर्रा की जरूरत के सामान की दुकान है। लॉकडाउन के बाद उन्होंने कई दिन दुकान बंद रखी। बाद में अपना धंधा दूसरे तरीके से शुरू किया। गुरुदयाल बताते हैं कि वह मोबाइल पर कॉल या व्हाट्सएप के जरिये ग्राहकों से सामान का ऑर्डर लेते हैं। उसे पैक करके रख लेते हैं और साथ में बिल लगा देते हैं। ग्राहक उनके घर के बाहरी हिस्से में आते हैं। वह बाउंड्री के अंदर से ही उन्हें सावधानीपूर्वक सामान पकड़ा देते हैं और भुगतान ले लेते हैं। लॉकडाउन का पूरी तरह पालन कर धंधा चला रहे हैं।
मनोवैज्ञानिक की टिप्पणी
लॉकडाउन अनिश्चय की स्थिति है और जो भी सक्षम है, वह भविष्य की चुनौतियों से निपटने के लिए तैयार हो रहा है। ऐसे हालात में नया कारोबार शुरू करने का मतलब यह नहीं है कि किसी ने अपना पुराना कारोबार छोड़ दिया। हो सकता है कि हालात सामान्य होने के बाद वह दोनों कारोबार चलाए लिहाजा यह लॉकडाउन भी उनके लिए एक तोहफा साबित होगा। - डॉ. हेमा खन्ना, बरेली कॉलेज में मनोविज्ञान विभाग की एचओडी
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