सड़क पर घूमते छुट्टा पशु
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बुजुर्ग की आकस्मिक मौत का दुख हमें भी है। ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए नगर निगम की टीमें छुट्टा पशुओं को पकड़ने का अभियान तेज करेंगी। नागरिकों से यही अपील है कि छुट्टा पशु दिखें तो नगर निगम के हेल्पलाइन नंबर 7055519637 पर कॉल कर दें, ताकि उनको पकड़कर गो-आश्रय स्थल भेजा जा सके। - उमेश गौतम, महापौर
ऐसा है शहर का हाल
नगर निगम कार्यालय के सामने ही छुट्टा पशु दिनभर घूमते रहते हैं। अफसर देखकर मुंह फेर लेते हैं। बृहस्पतिवार दोपहर अमर उजाला की टीम वहां पहुंची तो सब्जी मंडी से नगर निगम के गेट तक कई पशु घूम रहे थे।
मिनी बाइपास रोड के किनारे कूड़े के ढेर पर छुट्टा पशुओं का जमावड़ा लगता है। लोग बताते हैं कि नगर निगम के अधिकारियों और कर्मचारियों को सारी हकीकत पता है पर कभी पशु पकड़कर बंद नहीं किए गए।
चौपुला से जंक्शन की ओर जाने वाली सड़क पर डलावघर है। यहां हमेशा दर्जनभर छुट्टा पशु मंडराते रहते हैं। वाहन से निकलने वाले लोग कई बार पशुओं से टकराकर घायल हो चुके हैं पर जिम्मेदार नहीं चेते।
राजेंद्रनगर में केके हास्पिटल रोड पर मरीजों और तीमारदारों का भी आवागमन रहता है। सड़क पर छुट्टा पशु खतरा बने हुए हैं। आम आदमी को इनके पकड़े जाने का इंतजार है।
आजमनगर में मुख्य मार्ग पर जगह-जगह छुट्टा पशु बैठे रहते हैं। मोहल्ले के लोगों ने बताया कि पांच साल से अधिकारी और नेता दोनों छुट्टा पशुओं से निजात दिलाने की बात कर रहे हैं पर अब तक ऐसा हो नहीं पाया।
पहले भी कई लोगों की जान ले चुके हैं छुट्टा पशु
छुट्टा पशु के हमले में करुणा शंकर पांडेय की मौत पहली घटना नहीं है। ट्यूलिया में तीन वर्ष में चार घटनाएं हो चुकी हैं। पांच जून 2021 को छुट्टा पशु के हमले में डोरीलाल (62) की जान चली गई थी। तीन अन्य घटनाओं में बीरेंद्र कुमार, पूजा व विशाल घायल हो गए थे।
नौ जून 2022 को सांड़ के हमले में सुभाषनगर निवासी बीरावली की जान चली गई थी। उनकी बहू बबिता खुराना ने बताया कि अब अगर सांड़ दिख जाता है तो डर लगता है। जिस सांड़ ने सास की जान ली थी, वह भी सुभाषनगर में ही घूमता है। चार-पांच सांड़ और हैं, जिनसे बचकर लोग निकलते हैं।