प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत निजी क्षेत्र की सहभागिता से गरीबों को निशुल्क और किफायती आवास उपलब्ध कराने के लिए सरकार अफोर्डेबल हाउसिंग नीति को मंजूरी देने जा रही है। इसमें बिल्डरों को कम से कम 250 आवासों की कालोनी बनाने की बाध्यता होगी जिसमें 35 फीसदी आवास गरीबों के लिए बनाने होंगे। इसके एवज में सरकार रियल स्टेट कारोबारयों को अपनी कालोनियां विकसित करने के लिए उनको विकास शुल्क समेत कई अन्य बड़ी छूटें देगी। इस नीति को अंतिम मंजूरी देने के लिए पांच जुलाई को शासन में प्राधिकरणों के उपाध्यक्ष, सचिव, इंजीनियर और रियल स्टेट कारोबारियों की मीटिंग बुलाई गई है जिसमें इस प्रोजेक्ट पर अंतिम मुहर लगेगी।
शहरी क्षेत्र में वर्ष 2022 तक सबको आवास उपलब्ध कराने की नीति के तहत सरकार निजी क्षेत्र की सहभागिता से अफोर्डेबल हाउसिंग नीति तैयार कर रही है। इसमें आर्थिक रूप से कमजोर और निमभन आर्य वर्ग पवाले परिवारों को सरकारी अनुदान पर निशुल्क आवास उपलब्ध कराने का प्रस्ताव है। अनुदान में 60 फीसदी राशि केंद्र और 40 फीसदी राज्य सरकार वहन करेगी। रियल स्टेट कारोबारी को कम से कम 250 आवासों की कालोनी बनानी होगी। इसमें कम से कम 35 प्रतिशत आवास ईडब्ल्यूईएस गरीबों के लिए आरक्षित होंगे। इनका न्यूनतम कारपेट एरिया 22.77 से 30 वर्ग मीटर तक होगा। प्रत्येक ईडब्ल्यूएस आवास के लिए 2.5 लाख की आर्थिक सहायता सरकार देगी जिसमें 1.5 लाख केंद्र सरकार और एक लाख की भागेदारी राज्य सरकार करेगी। व्यवसायिक उपयोग के लिए कुल एफएआर का अधिकतम 10 प्रतिशत तल क्षेत्र निर्धारित किया जाएगा। इसमें ईएसडब्ल्यूएस समेत अन्य भवन प्रचलित उपविधि के अनुसार निर्मित किए जाएंगे। बिल्डर को ईडब्ल्यूएस इकाईयों का निर्माण कर उन्हें शासकीय अभिकरण से चिह्नित लाभार्थियों के पक्ष में देना होगा जिसकी 2.5 लाख रुपये प्रति आवास की दर से रकम सरकार मुहैया कराएगी। ईडब्ल्यूएस आवासों की लागत अधिक आने की भारपाई बिल्डर विकास शुल्क समेत सरकार द्वारा प्रदान की जाने वाली अन्य रियायतों से करेंगे। लाभार्थी को आवास की रजिस्ट्री में भी स्टांप ड्यूटी शुल्क की छूट दी गई है। बिना रजिस्ट्री शुल्क अदा किए ही लाभार्थियों को ईडब्ल्यूएस आवास दिए जाएंगे।
ये होंगी शर्तें
1- बाह्य विकास शुल्क देने में छूट होगी। कालोनी में विकास कार्य बिल्डर को खुद करने होंगे
2- भू उपयोग को आवासीय में परिवर्तन करना अनिवार्य होगा लेकिन उसको भू-उपयोग परिवर्तन शुल्क में छूट मिलेगी
3- भू-परिवर्तन होने पर प्राप्त प्रस्तावों का परीक्षण प्राधिकरण सचिव की अध्यक्षता में गठित चार सदस्यीय कमेटी करेगी
4- भू-उपयोग परिवर्तन की कार्यवाही 46 दिन में पूरी की जाएगी
5- बिल्डर को जमीन खरीदने के समय स्टांप ड्यूटी शुल्क देना होगा। लेकिन लाभार्थी को मकान देते समय स्टांप ड्यूटी निशुल्क होगी।
6- बिल्डर किसानों के साथ लैंड पूलिंग एवं डेवलपर एग्रीमेंट कर सकते हैं।
7- ईडब्ल्यूएस आवास की जमीन का पूरा उपयोग न होने की स्थिति में अवशेष जमीन पर आवासीय भूखंडों बनाकर या खाली जमीन को किसी अन्य व्यक्ति को भी बेचा जा सकेगा।
अफोर्डेबल हाउसिंग इन पार्टनरशिप नीति पर शासन ने पांच जुलाई को प्राधिकरणों, रियल स्टेट कारोबारियों और इंजीनियरों की मीटिंग बुलाई है। उसमें सबसे सुझाव लिए जाएंगे। कुछ बिंदुओं पर संशोधन किया जा सकता है। प्रोजेक्ट को फाइनल टच इसी दिन तय होने की उम्मीद है।
- डा. सुरेंद्र कुमार पांडेय, उपाध्यक्ष बरेली विकास प्राधिकरण