बरेली। जिले में संचालित साथिया केंद्रों को क्लीनिक बनाकर किशोर-किशोरियों को बेहतर जानकारी मुहैया कराने की मंशा कागजों में दबकर रह गई। जारी 1.2 लाख रुपये का बजट खप गया, पर क्लीनिक संचालित नहीं हुए। अफसर अभी कुछ और सामान खरीदने की बात कह रहे हैं।
किशोर-किशोरियों को पोषण, शारीरिक बदलाव, मानसिक-शारीरिक उत्पीड़न, यौन हिंसा समेत अन्य जानकारी देने के लिए शासन ने जिला अस्पताल और महिला अस्पताल में साथिया केंद्र का संचालन 14 वर्ष पूर्व शुरू किया था। इन्हें उच्चीकृत कर बतौर क्लीनिक संचालन के लिए शासन से 1.2 लाख रुपये का बजट जारी हुआ था। बताते हैं कि बजट से उपकरण खरीद लिए गए हैं, पर अब तक इनका संचालन न होने से अफसरों की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं।
प्रकरण पर सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह का कहना है कि उपकरण जेम पोर्टल से खरीदे जाने हैं। कुछ उपकरण खरीदे जा चुके हैं और कुछ जेम पोर्टल पर उपलब्ध नहीं हैं। उपलब्धता होने पर उनकी खरीद की जाएगी। जैसे ही पूरा सामान खरीद लिया जाएगा, क्लीनिक का संचालन शुरू करा दिया जाएगा। पहले क्लीनिक का संचालन महिला अस्पताल में किया जाना प्रस्तावित है।
पांच हजार रुपये से साइन बोर्ड, 30 हजार रुपये से एलईडी टीवी, 50 हजार रुपये से एलईडी प्रोजेक्टर, 15 हजार रुपये से कक्ष का रेनोवेशन, दस हजार रुपये से आरओ सिस्टम, दस हजार से फर्नीचर की खरीदारी का प्रस्ताव है।