बरेली। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) घोटाले के तार बरेली से भी जुडे़े हैं। बदायूं में भ्रष्टाचार के आरोप में पुलिस द्वारा गिरफ्तार किए गए छह मिशन कर्मचारियों में से एक कर्मचारी कर रिश्तेदार बरेली डीआरडीए में भी लंबे समय तक समूह गठन के काम देखता रहा है। उसने अपने एनजीओ के अंडर में ज्यादातर स्वयं सहायता समूह बनाए, जिसमें अधिकांश समूह उसके परिवार और रिश्तेदारों के थे। इन समूहों को बिना काम किए ही रिवाल्विंग फंड दिलाया गया। डीआरडीए में 2016 से पहले गठित स्वयं सहायता समूहों के रिकार्ड ही उपलब्ध नहीं हैं।
बदायूं में एनआरएलएम के जिला मिशन प्रबंधक समेत छह कर्मचारियों को स्वयं सहायता समूहों के गठन में किए गए करोड़ों के घपले में गिरफ्तार किया गया है। इनमें घोटाले में शामिल जिला मिशन प्रबंधक के तार बरेली डीआरडीए से भी जुडे़ थे। मिशन प्रबंधक का एक रिश्तेदार डीआरडीए बरेली में लंबे समय तक डीआरडीए में कर्मचारी रहा, जो पिछले साल रिटायर हो चुका है। सूत्रों की मानें तो डीआरडीए के रिटायर कर्मी ने अपने बदायूं के रिश्तेदार की मदद से बरेली के ब्लाक रामनगर और मझगवां में अपने रिश्तेदारों के नाम से महिलाओं के बड़ी संख्या में स्वयं सहायता समूह खुलवाकर रिवाल्विंग फंड भी दिलाया। इन समूहों को प्राइमरी और जूनियर स्कूलों के बच्चों को ड्रेस वितरण के काम दिलाकर बड़ा गोलमाल किया गया। अब डीआरडीए में ज्यादातर समूहों के रिकार्ड ही उपलब्ध नहीं हैं।
घपले के बाद बरेली में करा ली तैनाती
तीन दिन पहले ही बदायूं में एनआरएलएम के जिला मिशन प्रबंधक के तौर कार्यरत मैनेजर को बरेली भेजा गया। मगर, बदायूं में एनआरएलएम का बड़ा घोटाला पकड़ में आते ही उसे वहां की पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। इससे पूर्व डीआरडीए कर्मी की उसके माध्यम से अपने समूह बनवाकर ड्रेस वितरण के ठेके दिलाने की योजना फेल हो गई। मगर, अब भी पूर्व कर्मी के बड़ी संख्या में फर्जी समूह चल रहे हैं, जिनको रिवाल्विंग फंड भी दिया जा चुका है। भोजीपुरा के एक गांव में रहने वाली अनुसूचित जाति की महिला ने रिटायर डीआरडीए कर्मी के खिलाफ स्वयं समूह गठन के नाम पर 70 हजार रुपये की ठगी करने, धमकी देने और अपशब्द कहने समेत विभिन्न धाराओं में रिपोर्ट दर्ज कराई थी।
बदायूं से जिला मिशन प्रबंधक तकसीर अहमद की बरेली में तैनाती हुई थी, लेकिन बदायूं में वह बड़े घोटाले में पकड़ा गया। इसलिए उसको बरेली डीआरडीए में ज्वाइन कराने से रोक दिया गया है। सत्येंद्र कुमार, सीडीओ