चार घंटे चली सर्जरी
इस चुनौती को स्वीकार करते हुए, इंसानों की जांघ की टूटी हड्डी जोड़ने वाली एक डिजाइनर प्लेट का उपयोग करने का निर्णय लिया गया। करीब चार घंटे चली सर्जरी में इस प्लेट को सटीकता से लगाया गया, जो सफल रही। डॉ. रोहित ने बताया कि बड़े पशुओं में फ्रैक्चर का प्रबंधन उनके अधिक भार के कारण चुनौतीपूर्ण होता है। यह मामला पशु चिकित्सा में एक सफल अध्ययन के रूप में देखा जा रहा है।
डॉ. रोहित ने बताया कि 300-400 किलो वजन वाले पशुओं की टांग पर लगातार भार पड़ता है। पशु के हिलने-डुलने से प्लेट लेट और अन्य इंप्लांट पर दबाव बढ़ने का जोखिम रहता है। इस मामले में प्लेटिंग के दो हफ्ते बाद भी कोई बड़ा घाव नहीं हुआ। पशु अब खड़ा होकर चल पा रहा है।
किसान का गाय से भावनात्मक जुड़ाव
किसान संदीप कुमार सिंह ने बताया कि उन्होंने इस गाय को छोटी बछिया के रूप में छुट्टा घूमते देखा था और फिर उसे पाल लिया। उन्होंने कहा कि यह सिर्फ पशु का इलाज ही नहीं, बल्कि गाय से जुड़े उनके लगाव को भी टूटने से बचाया है। सर्जरी के बाद गाय अब खड़ी हो रही है, थोड़ी दूरी तक चल भी रही है और सामान्य रूप से घास खा रही है। किसान ने वैज्ञानिक टीम का आभार व्यक्त किया।