फुलप्रूफ प्लान बनाकर पकड़ा
इसके बाद वह फिर अप्रैल में इसी हाल में दिखाई दिया। तब उसके घर के आसपास जाकर पड़ताल की। आर्यन के फर्जीवाड़े के बारे में सारी जानकारी जुटाने के बाद उसे पकड़ने का फुलप्रूफ प्लान बनाया गया। एक आम नागरिक बनकर आर्यन को फोन किया गया कि शहीद संग्रहालय में कुछ युवाओं को सेना में भर्ती के लिए प्रेरित करना है। पहले 11 जून को कार्यक्रम निर्धारित किया गया लेकिन आर्यन ने खुद के लखनऊ में होने की बात कही। इस पर शुक्रवार को सुबह दस बजे कार्यक्रम का सारा सेटअप बनाया गया।
एक एकेडमी में अग्निवीर भर्ती की तैयारी कर रहे 10-12 युवाओं को म्यूजियम में बुलाया गया। सुबह करीब 10:45 बजे आर्यन अपनी पूरी ठसक के साथ कार से आया। उसके साथ बाउंसर आए, जिन्हें वह एनएसजी कमांडो बताता था। गेट खोला और फिर ब्रिगेडियर की फुल ड्रेस में आर्यन उतरा। आसपास बिना वर्दी के सैनिक सतर्क खड़े रहे। दरअसल अधिकारियों को शंका थी कि पकड़े जाने के डर से वह कोई अनहोनी कर सकता है इसलिए पूरी सतर्कता बरती गई। उसने युवाओं को संबोधित भी किया।
अधिकारियों ने उसे युवाओं को गिफ्ट देने के लिए कहा, वही सही मौका मानकर सैनिकों ने उसे दबोच लिया। तब उसे एहसास हुआ कि वह फंस गया है। इसके बाद उससे पूछताछ शुरू की गई। पकड़े जाने के बाद भी आर्यन पूरे आत्मविश्वास से सभी को गुमराह करने का प्रयास करता रहा। कभी दिल्ली तो कभी चंडीगढ़ में अपनी तैनाती बताई। दोनों स्थानों पर पता किया, लेकिन ऐसा कोई युवक वहां पोस्टेड नहीं मिला। आर्मी इंटेलिजेंस की टीम ने उसके किसी देशविरोधी कृत्य में शामिल होने की भी जांच की। उसके पास से बरामद लैपटॉप-मोबाइल के अलावा उसके घर जाकर भी जांच की गई। उसके पास स्टेथोस्कोप भी मिला है।
आरोपी आर्यन और उसके साथी
- फोटो : संवाद
कार पर रखी टोपी, बेंत व नकली पिस्टल
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दिल्ली से खरीदी थी एयर गन और बेंत
आर्यन वर्मा के अनुसार, उसे शूटिंग का शौक है, इसलिए पिछले साल दिल्ली से उसने एयर गन खरीदी थी। साथ ही आर्मी की बेंत भी उसने दिल्ली से खरीदने की बात बताई।
आर्यन बोला- मां का सपना पूरा करना चाहता था
रोजा क्षेत्र की दुर्गा एंक्लेव कॉलोनी में रहने वाले आर्यन की मां मनोज कुमारी भावलखेड़ा ब्लॉक के एक प्राइमरी स्कूल में शिक्षिका हैं। पिता अनिल वर्मा पहले विकास भवन में उद्यान विभाग में इंस्पेक्टर थे, लेकिन वर्तमान में पुवायां के लखपेड़ा में तैनात हैं। पिता की कार ही आर्यन इस्तेमाल करता था।
आर्यन के अनुसार, दिल की मरीज उसकी मां उसे सैन्य अधिकारी बनाना चाहती थीं। मां का सपना पूरा करने के लिए ऐसा किया। वह करीब दो साल से दिल्ली में रहकर नीट की तैयारी कर रहा था। दो बार परीक्षा दी, लेकिन रैंक इतनी अच्छी नहीं थी कि उसे सरकारी कॉलेज मिल जाए। इसके बाद दिल्ली से ब्रिगेडियर की वर्दी खरीदी। बिहार के मयंक नाम के सोशल साइट पर बने दोस्त के जरिये फर्जी पहचान कार्ड बनवाया। साथ ही जनरल ब्रिगेडियर डॉ. आर्यन वर्मा के नाम से गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एवं मिनिस्ट्री ऑफ डिफेंस का विजिटिंग कार्ड भी छपवाया।
आरोपी ने परिवार को भी किया गुमराह
कार्ड के पीछे आर्म्ड फोर्स मेडिकल कॉलेज पुणे महाराष्ट्र, कमांड हॉस्पिटल कमांडेंट ऑफिसर हरियाणा, एयरफोर्स स्टेशन जनरल ब्रिगेडियर, पंचकुला, हरियाणा लिखा हुआ है। उसने बताया कि वर्ष 2023 में वह आर्म्ड फोर्स मेडिकल कॉलेज, पुणे गया था। वहां लोगों को वर्दी पहना देख प्रभावित हुआ था। उसकी बहन की बीमारी से मौत हो चुकी है। उसका एक छोटा भाई भी है। वहीं, पिता के मुताबिक आर्यन ने जनवरी में परिजनों को बताया था कि उसका चयन सेना की मेडिकल कोर में ब्रिगेडियर के पद पर हो गया है। उसे आउट ऑफ टर्न प्रमोशन मिला है। परिजनों ने आसानी से उसकी बात का विश्वास कर लिया।