बरेली। विद्युत निगम में रिश्वत लेते रंगे हाथ बाबू के पकड़े जाने के बाद अब एक्सईएन भी जांच के घेरे में आ गए हैं। उपभोक्ता की ओर से तीन बार शिकायत होने के बाद भी समाधान न होने को लेकर उनकी भूमिका संदिग्ध है। दो सदस्यीय जांच समिति अब एक्सईएन से जवाब तलब करने की तैयारी में है।
शनिवार को एंटी करप्शन की टीम ने 20 हजार की घूस लेते हुए विद्युत निगम के बाबू अजीत कुमार पांडेय को गिरफ्तार किया था। आरोपी के बैग से 1.76 लाख रुपये की बरामदगी भी हुई थी। कोतवाली में रिपोर्ट दर्ज कर उसे जेल भेजा गया था। मुख्य अभियंता ज्ञान प्रकाश ने विभागीय जांच के लिए अधिशासी अभियंता धर्मराज सिंह और ओम प्रकाश सिंह को नियुक्त किया है। इन्हें 15 दिन में रिपोर्ट देनी है।
पीड़ित की ओर से दर्ज हुई एफआईआर के तहत भी विभागीय जांच को आगे बढ़ाया जा रहा है। इसमें बताया है कि आभाष सात माह से दफ्तर के चक्कर लगा रहे थे। वह तीन बार एक्सईएन से भी मिले। उन्होंने नौ, 17 और 24 जुलाई को प्रार्थनापत्र दिया था। इसके बाद भी बाबू अजीत के पास भेज दिया गया।
30 लाख से अधिक के घोटाले में भी आ चुका है नाम
संबंधित एक्सईन का नाम उनके डिवीजन में ही 30 लाख के बिलों के भुगतान के मामले में भी आ चुका है। इसमें फर्जी चेक आदि की भी बात सामने आई थी, लेकिन विभागीय जांच में इन्हें दबा दिया गया। संवाद
किसी भी तरह का भ्रष्टाचार, उपभोक्ताओं का उत्पीड़न विद्युुत निगम में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। समिति को निष्पक्ष जांच के निर्देश दिए हैं। रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। - ज्ञान प्रकाश, मुख्य अभियंता