बरेली। औद्योगिक क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति की राह में पेड़ों की टहनियां बाधक बन रही हैं। परसाखेड़ा, सीबीगंज, ट्रांसपोर्ट नगर, फरीदपुर के उद्यमी वर्षों से भूमिगत बिजली लाइन डालने की मांग कर रहे हैं, पर प्रस्ताव फाइलों में अटका हुआ है। इधर, हवा जरा सी तेज होते ही बिजली गुल हो जाती है और उद्योगों में उत्पादन ठप हो जाता है।
परसाखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र के बिजली उपकेंद्र से सीबीगंज औद्योगिक क्षेत्र तक करीब ढाई किलोमीटर लंबी बिजली लाइन घने पेड़ों के बीच से गुजरती है। दो-तीन साल में शाखाओं की छंटाई कराई जाती है, पर कुछ ही महीनों में ये फिर तारों तक पहुंच जाती हैं। इससे लाइन में ट्रिपिंग, स्पार्किंग, फॉल्ट की समस्या बनी रहती है।
उद्यमी कपिल चंदानी के मुताबिक, हर साल यही स्थिति होती है। तेज हवा में बिजली आपूर्ति प्रभावित होने से उत्पादन ठप हो जाता है। औद्योगिक संगठनों ने कई बार समस्या के स्थायी समाधान की मांग उठाई, पर कवायद आगे नहीं बढ़ सकी।
छह साल से भूमिगत लाइन का इंतजार
परसाखेड़ा से सीबीगंज तक भूमिगत केबल खराब होने पर उसे दुरुस्त कराने की मांग हो रही है। विद्युत निगम ने इस कार्य के लिए करीब सवा करोड़ रुपये का प्रस्ताव तैयार कर बीते वित्त वर्ष में नगर निगम को भेजा था। उद्यमियों का कहना है कि औद्योगिक क्षेत्र से विकास शुल्क व अन्य मदों में लाखों रुपये वसूले जाते हैं, पर मूलभूत सुविधाएं मुहैया कराने के लिए ठोस प्रयास नहीं हो रहे हैं।
आठ किमी लंबी लाइन बनी परेशानी
ट्रांसपोर्ट नगर की बिजली आपूर्ति हरूनगला उपकेंद्र से होती है। करीब आठ किलोमीटर लंबी लाइन कई इलाकों और पेड़ों से होकर गुजरती है। इससे ट्रिपिंग, फाॅल्ट होते हैं। कारोबारी रमेश अग्रवाल के मुताबिक, बिजली लाइन को नकटिया उपकेंद्र से जोड़ने की मांग की जा रही है पर सुनवाई नहीं हुई। कारोबारी तामीर अली के मुताबिक, आंधी-बारिश के बाद दो सौ से अधिक ट्रांसपोर्टर, मैकेनिक, ऑटो पार्ट्स कारोबारी तीन दिन से अंधेरे में हैं।
फरीदपुर में भी उठ रही स्थायी समाधान की मांग
फरीदपुर औद्योगिक क्षेत्र में भी हर वर्ष पेड़ों की छंटाई और बिजली लाइनों के रखरखाव का मुद्दा उठता है। संगठन के अध्यक्ष गुरप्रीत सिंह के मुताबिक, बार-बार अस्थायी उपायों पर खर्च करने के बजाय भूमिगत केबल डाल दिया जाए तो बिजली संकट का स्थायी समाधान हो जाएगा। ट्रिपिंग और फॉल्ट के चलते कई उद्योग जनरेटर के सहारे होते हैं। डीजल खर्च बढ़ जाता है।