बरेली। आमतौर पर सिर में दर्द, चक्कर आना, उल्टी, याद्दाश्त कमजोर होने का अहसास लोग नजरंदाज करते हैं। चिकित्सक के मुताबिक ये ब्रेन ट्यूमर के संभावित लक्षण हैं। अगर समय से विशेषज्ञ चिकित्सक को दिखाकर जांच और इलाज न शुरू हो तो जान का जोखिम बन सकता है।
ब्रेन ट्यूमर दिवस पर भोजीपुरा निजी मेडिकल कॉलेज के न्यूरो फिजिशियन डॉ. सचिन सिंह से बातचीत में उन्होंने बताया कि युवा कैंसर रहित ब्रेन ट्यूमर के चपेट में आ रहे हैं। प्रति सप्ताह संदिग्ध लक्षण वाले तीन से चार मरीज पहुंच रहे हैं। पूछताछ में पता चलता है कि जानकारी के अभाव में मरीज झोलाछाप डॉक्टरों के चक्कर लगाकर सिरदर्द की दवा खाते रहते हैं। जब बेतहाशा दर्द होता है तब इलाज के लिए पहुंचते हैं। बताया कि ट्यूमर शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है, लेकिन मस्तिक में ट्यूमर यानी गांठ खतरनाक होती है।
बताया कि प्रोलेक्टिम (हार्मोन) या सेल्स बढ़ने पर ट्यूमर बनता है। जो तेजी से बढ़ते हुए एक ही स्थान पर इकट्ठा होने लगते हैं। गतिमान न होने से वह वहीं मरने लगते हैं और ट्यूमर की वजह बन जाते हैं। तत्काल इलाज न किया जाए तो जानलेवा कैंसर की वजह बन सकते हैं।
90 फीसदी ट्यूमर दवाओं से हो जाते हैं ठीक
डॉ. सचिन के मुताबिक ट्यूमर तीन तरह के होते हैं। पहला बिनाइन जिसे मेनीजियोमा कहते हैं। यह कैंसर नहीं होता। सर्जरी से निकल जाता है। दूसरा, कैंसर वाले ट्यूमर में सर्जरी जरूरी है। तीसरा, पिट्यूटरी में हार्मोन बढ़ने से ट्यूमर बनता है। हालांकि, तीनों ही ट्यूमर का समय पर इलाज हो तो 90 फीसदी दवा से ठीक हो जाते हैं। बता दें कि जिला अस्पताल में न्यूरो फिजिशियन न होने से मरीज हायर सेंटर रेफर हो रहे हैं। ब्यूरो
बचाव के उपाय
- सोने, जागने का समय तय हो। अच्छी नींद लें।
- नियमित योगाभ्यास, ध्यान और व्यायाम करें।
- मोबाइल पर लगातार बात न करें। थोड़ा रूकें।
- मानसिक तनाव और प्रदूषण से सुरक्षित रहें।