बरेली। गैनी के अवैध ब्रह्मदेव अस्पताल में जच्चा-बच्चा की मौत के बाद किरकिरी हुई तो स्वास्थ्य विभाग ने सोमवार को उसे सील कर दिया। कार्रवाई की भनक लगते ही संचालक मौके से भाग गया। अब उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी है। 30 सितंबर को नोटिस जारी होने के बावजूद अस्पताल पर कार्रवाई नहीं की गई थी। आरोप है कि सत्तापक्ष के एक जनप्रतिनिधि की पैरवी के चलते नोडल अधिकारी ने कार्रवाई रोक दी थी।
जोगीठेर गांव निवासी द्वारका प्रसाद ने बताया कि पत्नी रिंकू देवी (21) को प्रसव पीड़ा होने पर आशा कार्यकर्ता की सलाह पर ब्रह्मदेव अस्पताल में भर्ती कराया था। शनिवार को प्रसव के बाद नवजात को मृत बताया गया। इसके बाद रिंकू देवी की हालत बिगड़ गई। परिजनों का आरोप है कि अस्पताल में योग्य चिकित्सक के बजाय झोलाछाप और अप्रशिक्षित कर्मचारियों ने प्रसव कराया। अत्यधिक रक्तस्राव के बावजूद महिला को समय से रेफर नहीं किया। शाम को अस्पताल ले जाते समय रास्ते में उनकी भी मौत हो गई।
इससे पूर्व 30 सितंबर को अस्पताल को नोटिस देने के बावजूद संचालन बंद न कराना स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर रहा है। जच्चा-बच्चा की मौत के बाद कार्रवाई करने पहुंचे अफसरों के सामने अब यह सवाल भी है कि समय रहते अस्पताल पर शिकंजा क्यों नहीं कसा गया?
कार्रवाई के डर से शटर गिराकर भागने लगे झोलाछाप
गैनी इलाके में किस कदर झोलाछापों का मकड़जाल फैला है, इसका खुलासा सोमवार को हुआ। दोपहर एक बजे स्वास्थ्य विभाग की टीम ब्रह्मदेव अस्पताल को सील करने पहुंची तो इसकी भनक लगते ही आसपास के झोलाछाप और मेडिकल स्टोर संचालक क्लीनिक और दुकानों के शटर गिराकर भागने लगे। टीम ने अस्पताल संचालक के बारे में स्थानीय लोगों से जानकारी ली, लेकिन कोई सटीक जवाब नहीं मिला।
पीड़ित ने दी तहरीर, 50-60 अस्पतालों पर उठाए सवाल
अलीगंज। जोगीठेर गांव के द्वारका प्रसाद ने सोमवार को थाने में तहरीर देकर आशा कार्यकर्ता और ब्रह्मदेव अस्पताल प्रबंधन पर कार्रवाई की मांग की है। उन्होंने बताया कि गांव की एक आशा कार्यकर्ता के कहने पर वह पत्नी रिंकू देवी (21) को ब्रह्मदेव अस्पताल ले गए थे। आरोप है कि उस अस्पताल में आरोपी आशा कार्यकर्ता की भतीजी कार्यरत है। गांव के लोग आशा कार्यकर्ताओं के झांसे में आकर अस्पताल चले जाते हैं। आरोप है कि ब्लॉक क्षेत्र में 50-60 अस्पतालों-क्लीनिकों में पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध नहीं हैं। इसके बावजूद आपातकाल में लोगों को इन अस्पतालों और क्लीनिकों का रुख करना पड़ता है, जो जान पर भारी पड़ जाता है। सीओ आंवला हेमंत उपाध्याय ने बताया कि तहरीर के आधार पर कार्रवाई की जाएगी। आशा कार्यकर्ता के संबंध में भी जांच कराई जाएगी।
वर्जन
नोटिस जारी करने के तीन बाद अस्पताल संचालक ने संपर्क किया था, लेकिन पंजीकरण संबंधी कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किए। जच्चा-बच्चा की मौत का मामला संज्ञान में आने पर सोमवार को अस्पताल को सील कर दिया। रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए संचालक के खिलाफ तहरीर भी दी जाएगी। - डऍ. सुचिता गंगवार, नोडल अधिकारी, झोलाछाप नियंत्रण सेल