कुर्सी तोड़ नौकरी, मोबाइल पर बातचीत, खेलना कूदना बंद, तनाव, फास्ट फूड और सॉफ्टड्रिंक। हाइपरटेंशन के लिए ये चीजें जिम्मेदार हैं। तेजी से बढ़ रही समस्या चौंकाने वाली बात है। इसलिए अभी हाल ही में एक रिसर्च के रिजल्ट में यह बात सामने आई है कि हाईपरटेंशन के लिए ब्लड प्रेशर काउंट अब 140 से 190 नहीं बल्कि 120 से 180 पर शुरू कर दें और इलाज करें।
रविवार को आईएमए में दिल्ली फोर्टिस एस्कोर्ट हर्ट इंस्टीट्यूट के हृदय रोग विशेषज्ञों की पूरी टीम ‘दिलकॉन’ कांफ्रेंस में जुटी। सुबह 10 से शाम को 5 बजे तक नौ दिल से जुड़े अलग- अलग टॉपिक और समस्याओं पर चर्चा की गई। इंटरवेशनल कार्डियोलॉजी के निदेशक डॉ. निशीथ चंद्रा ने मैनेजमेंट ऑफ हाईपरटेंशन इन 2016 पर जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पश्चिमी देशाें में यह रिसर्च हुआ था। उसके स्प्रिंट ट्रायल हुए, जिसमें यह बात सामने आई कि बीपी काउंट घट गया है। अब यह 120 से 180 है। कांफ्रेंस के दौरान सोडियम यानी नमक को लेकर भी सवाल उठे। इस पर डॉ. चंद्रा ने कहा कि अभी नमक को हाईपरटेंशन के लिए पूरी तरह दोषी नहीं ठहरा सकते। हां, 5 ग्राम से अधिक नमक न लें। चिंता हर वर्ग के लोगों में हैं। इसलिए हाईपरटेंशन के कारण इसमें भी अलग- अलग हो सकते हैं।
बचपन से ही शुरू कर दें हाइपरटेंशन से निपटने की तैयारी
डॉ. निशीथ चंद्रा ने बताया कि हाइपरटेंशन आने वाले समय में एक बड़ी चिंता बनेगी। इसलिए सरकारी अस्पतालाें में इसकी अलग से जांच हो रही है। बचपन से ही इससे निपटने की तैयारी शुरू कर दें। अच्छी आदतें बच्चाें को दे। सुबह जल्दी उठने, मैदान में खेलने, टीवी और कंप्यूटर के लिए एक से दो घंटे का समय तय करें। रोजाना 3 लीटर पानी पीने की सलाह दें और साग- सब्जी, फल खाने की आदत डालें। अगर बच्चाें ने इतना कर लिया तो हाइपरटेंशन छू नहीं सकेगा।
योग और मेडिसिन ही बचा सकता है हाइपरटेंशन से
आधुनिक चिकित्सा भी योग और मेडिटेशन का लोहा मान रही है। डॉ. चंद्रा कहते हैं कि भारतीय संस्कृति की इन विधाओं में स्ट्रेस यानी तनाव खत्म करने की ताकत है। योग और मेडिटेशन से शरीर मजबूत होगा और लोग तनाव मुक्त हो सकते हैं।
बॉडी बिल्डर और एथलीट बनने से पहले दिल को समझ लें
बॉडी बिल्डिंग में करियर बनाना हो या फिर एथलीट बनने के लिए पसीना बहाना हो। सबसे पहले अपने दिल को समझ लें कि वह आपका साथ देगा की नहीं। हृदय की ध्वनि को समझने वाले और पेसिंग एंड इलेक्ट्रोफिजियोलॉजी के निदेशक डॉ. अनिल सक्सेना ने बताया कि अक्सर यह घटनाएं सामने आती हैं कि दौड़ रैली में युवक की सांसे थम गई या फिर दौड़ने से पस्त होने पर आईसीयू में भर्ती होना पड़ा। इसलिए पहले ईसीजी या इको करवा लें। डॉ. सक्सेना ने बताया कि सोते समय हमारी हार्टबीट 50 से 60 हो जाती है, लेकिन फिर भी अधिकतर लोगों को सोते समय ही अटैक आता है। इसलिए इसे मापने के लिए आईसीडी यानी इम्प्लांटेबल कार्डियोवर्टर डिफिब्रिलेटर को शरीर में इंम्पलांट किया जाता है। यह हार्टबीट को मॉनीटर करता है। अभी इसका खर्च 3 से 5 लाख है।
सीने में सूई सी चुभन हो तो हार्ट अटैक नहीं
अक्सर लोगों के सीने में सूई जैसी चुभन होती है। लोग इतना घबरा जाते हैं कि वह इसे हार्ट अटैक समझते हैं। जबकि ऐसा नहीं है। चेस्ट पेन एंड मल्टीडिसिप्लीनरी प्रॉब्लम पर डॉ. अविनाश वर्मा ने बताया कि हार्टअटैक का दर्द सीने के किसी हिस्से में नहीं हो सकता, बल्कि पूरे सीने में होता है। सीने में दबाव, जकड़न, सांस न ले पाना लक्षण हैं। लेकिन अगर हाथ व जबड़े में दर्द के साथ पसीना व उलझन हो रही हो तो हार्ट अटैक का संकेत हैं। उन्होंने कहा कि 15 से 20 फीसदी सीने का दर्द ही हार्ट से रिलेटेड होता है।
रिस्क फैक्टर में हैं तो 40 के बाद जरूर कराएं जांच
हृदय सर्जरी विशेषज्ञ डॉ. जेडएस महरवाल ने बताया कि एशिया और भारत में दिल की बीमारी बढ़ने का बड़ा कारण जेनेटिक फैक्टर तो है ही साथ में शुगर, बीपी, धूम्रपान, हाई कोलेस्ट्रोल, लाइफ स्टाइल खराब होना भी है। यह सभी रिस्क फैक्टर अटैक की संभावना हैं। अगर आप भी इन फैक्टर में आते हैं तो 40 साल के बाद नियमित रूप से दिल की जांच कराएं। इससे आगे चलकर आपरेशन की समस्या कम हो सकती है।
दिल से जुड़ी बीमारी है तो गर्भधारण से पहले दें ध्यान
पीडियाट्रिक कार्डियोलॉजी के निदेशक डॉ. राधाकृष्णनन ने बताया कि अगर किसी महिला को पल्मोनरी हाइपरटेंशन हो, दिल का आपरेशन और दिल ठीक तरह से काम न कर रहा हो, तो ऐसी महिलाएं गर्भधारण न करें। यह उनके लिए खतरनाक हैं। इनके लिए बच्चाें को गोद लेना ही उपाय है। यह महिलाएं हाईरिस्क में आती हैं। अगर गर्भधारण हो गया है तो बहुत ही ध्यान देने की जरूरत है। स्त्री रोग विशेषज्ञ के साथ हृदय रोग विशेषज्ञ को दिखाना जरूरी है। इसलिए गर्भधारण से पहले राय लें अचानक प्लान न करें।
‘दिलकॉन’ में सहयोग
साइंटिफिक कमेटी के चेयरमैन डॉ. सुदीप सरन, आईएमए अध्यक्ष डॉ. रवीश अग्रवाल, सचिव डॉ. डीपी गंगवार, डॉ. राजेश अग्रवाल, डॉ. प्रमेंद्र माहेश्वरी, डॉ. अनूप आर्या व आईएमए बरेली की टीम।