बरेली। उम्र के साथ हड्डियों का कमजोर होना सामान्य बात है पर जरा सा झटका भी फ्रैक्चर की वजह बन जाए तो व्यक्ति ऑस्टियोपोरोसिस की चपेट में हो सकता है। जीवनशैली में आए बदलाव के बाद अब धूप से दूरी इसकी बड़ी वजह है। धूप की कमी से शरीर में कैल्सियम और विटामिन डी की प्रक्रिया प्रभावित होने से बोन मास में कमी आ रही है।
वरिष्ठ आर्थोपेडिक सर्जन डॉ. आरके सिंह के मुताबिक ऑस्टियोपोरोसिस की चपेट में आने पर हड्डियां बेहद कमजोर हो जाती हैं। हल्के से झटके या खिंचाव से भी फ्रैक्चर की आशंका रहती है। उम्र बढ़ने के साथ हड्डियों का टूटना तो चलता रहता है, पर बनने की प्रक्रिया रुक जाती है। इससे हड्डियां नाजुक हो जाती हैं। तब ऑस्टियोपोरोसिस होने की आशंका बढ़ जाती है। विटामिन डी और कैल्शियम की कमी समेत आनुवंशिक प्रवृति भी इस बीमारी की वजह हो सकती है। सूर्य के प्रकाश का शरीर पर न पड़ना और प्रदूषण भी इसकी वजह है। ऐसी स्थिति में दूध, पनीर, दही, छाछ आदि का सेवन करना चाहिए।
लाइलाज है बीमारी, बचाव ही उपाय
डॉ सिंह के मुताबिक 35 वर्ष की उम्र के बाद बोन मास (घनत्व) कम होने लगता है। बोन मास जितना कम होता है, हड्डियां भुरभुरी होने लगती हैं और ऑस्टियोपोरोसिस का खतरा बढ़ जाता है। पुरुषों के मुकाबले महिलाएं इस बीमारी से ज्यादा पीड़ित हैं। इस बीमारी का अब तक कोई ठोस इलाज नहीं मिल सका है। समय रहते इलाज शुरू हो जाए और जीवनशैली में बदलाव हो तो कुछ हद तक समस्या का निदान हो जाता है। अन्यथा एक बार हड्डी का फ्रैक्चर हो जाए तो ठीक होना मुश्किल है।
ये हैं लक्षण
- पीठ, हाथों और पैरों में दर्द होना।
- शरीर का झुका हुआ महसूस होना।
- बेवजह कमजोरी महसूस होना।
- थोड़े से दबाव पर हड्डी टूट जाना।
बचाव के उपाय
- नमक, चीनी, कैफीन, शराब, सोडा, कोल्डड्रिंक के सेवन से बचें।
- हरी सब्जियां, छाछ, दही, सलाद आदि खाएं।
- प्रोटीन के लिए सोयाबीन, स्प्राउट्स, दालें, मक्का और बीन्स आदि खाएं।
- कैल्सियम के लिए दूध, कच्चा पनीर, दही, मखाने आदि का सेवन करें।
- नियमित रूप से व्यायाम करें। सुबह की गुनगुनी धूप में आधे घंटे बैठें।