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क तुक भलो लागी रौ मेरो पहाड़...

Sun, 15 Jan 2017 01:20 AM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, बरेली
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Blo ... rancorous sense of euphoria mountain Mero - फोटो : बरेली, अमर उजाला
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पहाड़ के गीतों की ठंडी बयार ने सूर्य उत्तरायण होने पर उसकी गुनगुनी गर्मी को जैसे गुम कर दिया। इस दौरान मैदान में सजा सांस्कृतिक मंच का पंडाल उत्तराखंड के किसी गांव की तरह लगा। यहां टोली में महिलाएं गीत गाती मिली और बच्चे उन पर कदम मिलाते। आरकेस्ट्रा में भी ढोल और बांसुरी वादकों ने कमाल का साथ दिया। मजे की बात रही कि यहां सिर्फ कु माऊं और गढ़वाल के गीत ही नहीं बल्कि पड़ोस के पहाड़ नेपाल के गीतों का भी छौंक लगा। छुट्टी होने के  चलते मेले में भीड़ भी खूब जुटी। स्टॉल पर लोग खरीदारी करने में मगन थे। 
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अगर बरेली क्लब मैदान के उत्तरायणी मेले में आ रहे हैं तो अगले तीन दिन आपको शहर पहाड़ के रंग में रंगा मिलेगा। दूर से ही पहाड़ी संगीत लाउडस्पीकर पर बज रहा है। शनिवार को सांस्कृतिक मंच पर जै हो कुमाऊं जै हो गढ़वाला...कतुक भलो लागी रौ मेरो पहाड़ा... और हरिया रूमाल गांढिबाल मिठाई छ, किलें रूछी विधा तेरो ख्योलो सिपाही छ... पर छोलिया नृत्य की आकर्षक प्रस्तुति देखने को मिली। लोगों अपने मोबाइल कैमरे में आगे याद ताजा करने को इन्हें रिकार्ड कर लिया। दूसरे दिन मेले की शुरूआत शहर विधायक अरुण कुमार ने की। इस अवसर पर एसके चतुर्वेदी चीफ इंजीनियर विशिष्ट अतिथि रहे। पिथौड़ागढ़ से प्रकाश रावत की पार्टी ने ईष्ट देवता वंदान जै हो वालागोडिया के वाद और ठंडो रै ठंडो प्यार पहाड़ की हवा ठंडो पानी ठंडो... गीत से अतिथियाें का स्वागत किया। प्रकाश ने नेपाली गीत लठी टेकी बोझो बोक्या लऊ तीन दिन मेरो क्षितियो हजुर लऊ गाया। कुमाऊं लोक सांस्कृतिक कला दर्पण लोहाघाट से भैरवदत्त राय की टीम ने जै हो नंदा देवी तेरी जै बोला से अपने कार्यक्रम की शुरूआत की। पहाड़ी कृषि पर आधारित नाट्य नृतिका का विहंगम दृश्य भी प्रस्तुत किया। जय पूर्णागिरी उत्थान समिति खटीमा से राजेंद्र मेहता की टीम ने भी कई प्रस्तुति दी। शाम को जीतेंद्र तुमक्याल और प्रियंका आर्या की जुदाई आवाज को सुनने के लिए श्रोता बैठे रहे। खिड़की में बैठी तू बाल बनूनी... सुनकर लोग खूब झूमे। मंच का संचालन आकाशवाणी रामपुर के सुरेंद्र राजेश्वरी ने किया। मीडिया प्रभारी माधवानंद तिवारी ने बताया कि रविवार को भी विशेष टीमें अपनी परफारमेंस देंगी। 

नोटबंदी बेअसर, कैश से हुई खूब खरीदारी
बरेली क्लब मैदान पर लगे मेले में नोट बंदी और करेंसी किल्लत का कोई असर नहीं दिखा। रविवार तक चलने वाले मेले में दूसरे दिन करीब सवा करोड़ रुपये का कारोबार हुआ। उत्तरायणी मेला 145 स्टाल लगे हैं, और करीब 50 दुकानें बाहर लगी हैं। गिने चुने दुकानदार ही इलेक्ट्रानिक लेनदेन कर रहे हैं। बाकी सभी नकद कैश में ही कारोबार करते मिले। ग्राहक भी नकद भुगतान करने में कोई परहेज नहीं कर रहे थे। लगभग सभी स्टालों पर ग्राहकों की भीड़भाड़ से साफ झलक रहा था कि नोट बंदी और करेंसी किल्लत हाबी नहीं है। मेला में दुकानदारों ने बताया कि पहले दिन तो कारोबार कम रहा लेकिन दूसरे दिन ग्राहक ज्यादा जुट रहे हैं। इससे लगता है कि उनका सारा सामान बिक जाएगा। ग्राहक इलेक्ट्रानिक भुगतान पर जोर नहीं दे रहे हैं, आसानी से नकद लेनदेन हो रहा है। उन्होंने बताया कि इस बार कुछ ज्यादा बेहतर कारोबार होने की उम्मीद है। अब तक सवा करोड़ रुपये से ज्यादा कारोबार हो चुका है।
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पेटीएम भी कर रहे हैं लोग 
मेले में कैश तो चल ही रहा है यहां कुछ दुकानदार पेटीएम, यूपीआई, भीम जैसे एप्लीकेशन भी प्रयोग कर रहे हैं। पेटीएम का प्रयोग आपको सबसे अधिक जगह मिलेगा। कपड़े और खानपान की दुकानों पर युवा इससे भुगतान कर रहे हैं। शनिवार को किड्स जोन में झूला झूलने के लिए भीड़ रही। 
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