पति की मौत के बाद दामाद को दिलाई सरकारी नौकरी, बेटी ने घर से निकाला
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80 साल की उम्र में इंसाफ मांगने डीएम के पास पहुंचीं दुर्गा देवी
बरेली। पांच बेटियों की बूढ़ी मां दर-दर भटक रही है। एडीएम कार्यालय में तैनात पति की मौत के बाद उन्होंने उनकी सरकारी नौकरी दामाद को इस शर्त पर दिला दी थी कि वह उनकी बाकी बेटियों की शादी के साथ उनकी देखभाल की जिम्मेदारी उठाएगा लेकिन हामी भरने वाली दूसरे नंबर की बेटी ही पति की नौकरी लगने के बाद इससे मुकर गई और उन्हें घर से निकाल दिया। 80 साल की बूढ़ी अम्मा ने अब डीएम से इंसाफ दिलाने की फरियाद की है।
कुर्मांचल नगर में रहने वाली दुर्गा देवी के पति उज्ज्वल सिंह एडीएम कार्यालय में तैनात थे। 12 सितंबर 1984 को उनकी मौत हो गई। दुर्गा देवी की पांच बेटियां हैं जिनमें से दो की ही उस समय शादी हो पाई थी। पति की मौत के बाद मृतक आश्रित कोटे में उनकी नौकरी लेने का मौका आया तो दुर्गा देवी की दूसरे नंबर की बेटी अपने पति के लिए के लिए नौकरी मांगने लगी। दुर्गा देवी ने इस शर्त पर उसके पति को नौकरी दिला दी कि वह उनकी बाकी तीन बेटियों की शादी कराने और उनका भरण-पोषण करने की जिम्मेदारी उठाएगा। दुर्गा देवी का आरोप है कि बेटी-दामाद दोनों ने इस पर हामी भरी लेकिन नौकरी मिलने के कुछ साल बाद ही 1990 में बेटी ने उन्हें इतना प्रताड़ित किया कि उन्हें सरकारी क्वार्टर छोड़ना पड़ा।
दुर्गा देवी ने कुर्मांचल नगर में बड़े दामाद के नाम पर कुछ जमीन खरीदी थी जिस पर उसने दो कमरे बनवा दिए थे। वह यहीं आकर रहने लगी। खुद ही दो छोटी बेटियों की शादी की। 2017 में सरकारी नौकरी लेने वाले दामाद की भी मौत हो गई तो नाती नौकरी पर लग गया। दुर्गा देवी का कहना है कि अब 80 वर्ष की उम्र में जब उन्हें सहारे की जरूरत है तो कोई उनकी देखभाल को तैयार नहीं है। उन्हें जो पेंशन मिलती है, उससे भी गुजारा नहीं चल रहा। सरकारी नौकरी कर रहा नाती भी उनकी कोई जिम्मेदारी उठाने को तैयार नहीं है। परेशान दुर्गा देवी ने डीएम से शिकायत की है।