मुहूर्त के बहाने भाजपा ने टिकटों की घोषणा टाल तो दी है लेकिन जिस तरह कुछ सीटों पर दावेदार जूझ रहे हैं उससे लगता है कि टिकटों की घोषणा के बाद कुछ बागी सुर जरूर उठेंगे। इसीलिए पार्टी जगह -जगह बैठकें कर कार्यकर्ताओं को समझा रही है कि जिन्हें टिकट नहीं मिल पाए उनके लिए आगे संगठन में उचित व्यवस्था की जाएगी। बरेली जिले की नौ में से चार सीटों पर तो लगभग सहमति हो चुकी है लेकिन पांच जगहों पर अब भी दावेदार आगे-पीछे हो रहे हैं। प्रदेश चुनाव चयन समिति ने प्रत्येक विधानसभा में दो से तीन दावेदारों के नामों का पैनल संसदीय बोर्ड और पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह को भेजे हैं। इनमें से दो सीटें ऐसी हैं जिन पर इस पैनल के बाहर के नाम भी चर्चा में बने हुए हैं।
खरमास के चलते पार्टी ने टिकट की घोषणा रोक रखी थी। प्रत्याशियों की पहली सूची 15 या 16 जनवरी को आ सकती है। सूत्रों के अनुसार भाजपा अपने तीन सिटिंग विधायकों के नाम पैनल में हैं जिनमें से एक पर नए चेहरे की वजह से संशय बना हुआ है। आंतरिक सर्वे में भी एक विधायक का टिकट काटने की सिफारिश की गई है। बिथरी में डा. राघवेंद्र शर्मा, पूर्व विधायक सुमनलता सिंह के अलावा सांसद धर्मेंद्र कश्यप की पत्नी सरोज कश्यप भी दौड़ में हैं। फरीदपुर में रामेश्वर प्रसाद दिवाकर, प्रो. श्याम बिहारी लाल और मेघनाथ कठेरिया और भोजीपुरा से पूर्व मंत्री बहोरनलाल मौर्य, धीरेंद्र गंगवार वीरू, प्रशांत पटेल और योगेश पटेल के बीच घमासान मचा है। सूत्रों के अनुसार बहेड़ी से छत्रपाल गंगवार और आंवला से वर्तमान विधायक धर्मपाल सिंह का टिकट लगभग फाइनल है। मीरगंज में भाजपा के जिला महामंत्री अजय राजपूत और तरुण गंगवार के नाम हैं। कुछ समय पहले तक बसपा से भाजपा में शामिल हुए पूर्व विधायक आरके शर्मा भी टिकट के प्रबल दावेदार माने जा रहे थे लेकिन उन्होंने अभी तक पार्टी में टिकट के लिए आवेदन नहीं किया है। नवाबगंज में केसर सिंह गंगवार और एमपी आर्या के नाम पैनल में भेजे गए थे। अभी तक केसर सिंह का पलड़ा भारी बताया जा रहा है। अब गेंद भाजपा के 12 सदस्यीय संसदीय बोर्ड के पाले में है जिसके अध्यक्ष अमित शाह हैं।