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बर्ड फ्लू का खतराः सीएआरआई: पीपीई किट पहनकर ही परिसर में दाखिल होंगे कर्मचारी

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आईवीआरआई - फोटो : सोशल नेटवर्क
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संस्थान अपने 40 हजार पक्षियों को संक्रमण से बचाने की कवायद में जुटा

बरेली। बर्ड फ्लू के बढ़ते खतरे को देखते हुए केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (सीएआरआई) ने अपने दुर्लभ पक्षियों को बचाने की कवायद तेज कर दी है। संस्थान में बाहरी लोगों का प्रवेश तो पहले से ही बंद है अब संस्थान के कर्मचारी भी पीपीई किट पहनकर ही परिसर में आ सकेंगे। इसके लिए कर्मचारियों को पीपीई किट उपलब्ध कराने के साथ सुरक्षा के दूसरे उपायों का भी अनुपालन कराए जाने की तैयारी है।
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सीएआरआई में विभिन्न दुर्लभ प्रजातियों के करीब 40 हजार पक्षी है। बर्ड फ्लू का खतरा पैदा होने के बाद सीएआरआई के वैज्ञानिकों की चिंता और ज्यादा बढ़ गई है। संस्थान में पक्षियों के शेड के पास बाहरी लोगों का प्रवेश पहले से ही रोक दिया गया है। साथ ही परिसर के अंदर के रास्तों पर नियमित दवाइयों का भी छिड़काव कराया जा रहा है। कई गेट बंद कर सिर्फ एक ही रास्ता खोला गया है, जो पक्षियों के शेड तक जाता है। जिंदा मुर्गा सहित अन्य पक्षियों की बिक्री पर पहले ही रोक लगी हुई है। अब संस्थान सुरक्षा को और भी ज्यादा पुख्ता करने और संक्रमण की रोकथाम के लिए संस्थान के कर्मचारियों को पीपीई किट, अप्रेन, मास्क, दस्ताना आदि देने की तैयारी चल रही है। इससे संक्रमण को पक्षियों के पास तक जाने से रोका जा सकेगा।
सीएआरआई के निदेशक बदले, लैब इंचार्ज का भी स्थानांतरण
भारतीय पशु चिकित्सा एवं अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) और केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान (सीएआरआई) के कई वैज्ञानिकों को तबादला हो गया है। आईवीआरआई के मानकीकरण विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. एके तिवारी को सीएआरआई का निदेशक बनाया गया है। उन्होंने शुक्रवार को कार्यभार भी ग्रहण कर लिया। इससे पहले इस पद पर सीएआरआई के पशु आनुवांशिकी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. संजीव कुमार पिछले करीब एक साल से प्रभारी के तौर पर कार्यरत थे। इसके अलावा आईवीआरआई में जेडी कैडरेड के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. आरके गुप्ता जो बर्ड फ्लू लैब के भी प्रभारी थे, वह नेशनल रिसर्च इंस्टीट्यूट (एनआरसी) गुवाहाटी में निदेशक हो गए हैं। आईवीआरआई में दैहिक एवं जलवायु विभाग के प्रधान वैज्ञानिक डॉ. मिहिर सरकार को याक रिसर्च इंस्टीट्यूट हिमाचल प्रदेश का निदेशक बना दिया गया है।

‘सीएआरआई में बर्ड फ्लू के खतरे को देखते हुए कर्मचारियों को पीपीई किट आदि देने की तैयारी है। संस्थान अपने पक्षियों को संक्रमित होने से बचाने की कोशिश कर रहा है।’ - डॉ. एके तिवारी, निदेशक, सीएआरआई

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