कानपुर में बर्ड फ्लू का केस मिलने के बाद सीएआरआई की बढ़ी चिंता
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संक्रमण रोकने के लिए परिसर के रास्तों में गड्ढे खोदकर डाली गई दवा
बरेली। कानपुर में बर्ड फ्लू का केस सामने आने के बाद केंद्रीय पक्षी अनुसंधान संस्थान यानी सीएआरआई में सतर्कता और ज्यादा बढ़ा दी गई है। वैज्ञानिकों का मानना है कि पक्षियों की आवाजाही के लिहाज से कानपुर काफी नजदीक है लिहाजा खतरा और बढ़ गया है। एहतियात बरतते हुए सीएआरआई के दुर्लभ पक्षियों के शेड की ओर जाने वाले रास्तों में गड्ढे खोदकर दवा डाली गई है। परिसर में जूते-चप्पल पहनकर आने पर भी पाबंदी लगा दी गई है।
बर्ड फ्लू का खतरा देखते हुए सीएआरआई पहले ही सतर्कता बढ़ाते हुए परिसर में बाहरी लोगों का प्रवेश बंद कर चुका है। सीएआरआई प्रबंधन महसूस कर रहा है कि परिसर में विभिन्न शेड में रखे गए लगभग 40 हजार दुर्लभ पक्षियों तक अगर संक्रमण पहुंच गया तो उसे रोक पाना संभव नहीं होगा। ऐसी नौबत आने से रोकने के लिए सीएआरआई ने उन रास्तों में गड्ढा खोदकर दवाएं डाली हैं जहां से कर्मचारियों का आवागमन होता है। इन रास्तों पर नंगे पैर ही परिसर में आने की इजाजत दी गई है ताकि जूते-चप्पल के जरिए संक्रमण अंदर न पहुंच सके। सीएआरआई इससे पहले आसपास के पेड़ों की शाखाएं भी कटवा चुका है ताकि उन पर बैठने वाले पक्षियों की गंदगी से संक्रमण अंदर पक्षियों तक न पहुंच सके।
आईवीआरआई में रोज 12 सौ तक सैंपल की जांच
भारतीय पशु चिकित्सा अनुसंधान संस्थान (आईवीआरआई) में पक्षियों के सैंपल की जांच बढ़ा दी गई है। संस्थान के वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. वीके गुप्ता ने बताया कि वैसे तो संस्थान पूरे साल बर्ड फ्लू की जांच करता है लेकिन अब संक्रमण का खतरा बढ़ने के बाद यूपी के साथ उत्तराखंड के विभिन्न इलाकों से लगातार पक्षियों के सैंपल जांच के लिए आ रहे हैं। लिहाजा रोजाना जांच की संख्या एक हजार से 12 सौ सैंपल तक पहुंच गई है। यह जांच कोरोना लैब को हटाकर वहीं कराई जा रही है।
कानपुर में बर्ड फ्लू का मामला सामने आने से चिंता बढ़ गई है। पक्षियों की आवाजाही के लिहाज से कानपुर काफी नजदीक है। इसलिए सीएआरआई ने सतर्कता और ज्यादा बढ़ा दी है। -डॉ. संजीव कुमार, निदेशक सीएआरआई