ऊर्जा बचत करने को सस्ते दामों पर एलईडी वितरण योजना में लगे ठेकेदारों ने पुरानी योजना में रिजेक्ट किए गए बल्ब शामिल कर लिए। जानकारी मिलने पर चीफ इंजीनियर बीके शर्मा ने कंपनी ठेकेदारों की फटकार लगायी और पूरा स्टाक चेक कर नयी सप्लाई लाने के निर्देश दिए हैं।
बरेली मंडल में बीते वर्ष सात वाट के एलईडी बल्ब सौ रुपये में बेचने की योजना चार अक्टूबर से शुरू हुई। बल्ब लोगों तक पहुंचाने के लिए एनर्जी एफिशिएंसी सर्विसेज कंपनी ने जगह जगह काउंटर लगाए और मोबाइल वैन दौड़ायी। इससे करीब सवा आठ लाख बल्ब लोगों तक पहुंच गए। स्थानीय स्तर पर कंपनी ने वितरण कार्य ठेकेदारों को सौंप रखा है। योजना लोकप्रिय होेते ही मनमानी होने लगी।
ये तो रिजेक्ट हो गए थे
बीते वर्ष राजीव गांधी ग्रामीण विद्युतीकरण योजना में े सामान्य होल्डर वाले बल्ब भारी तादाद में रिजेक्ट किए गए थे। गांव में बीपीएल कनेक्शन पर यह एलईडी बल्ब फ्री दिया जाता है। इस बीच शहरों में योजना आ गयी। गांव में फ्री दिया जा रहा बल्ब कहीं अवैध रुप से शहरी योजना में घुसपैठ न कर ले इसलिए इसे रोकने को चूड़ीनुमा होल्डर पर बने एलईडी बल्ब ग्रामीण योजना में शामिल किए गए। ग्रामीण योजना में काम करा रही कंपनियों के पास भारी तादाद में बल्ब डंप थे। इसे खपाने के लिए शहर में लगे काउंटर संचालकों से साठगांठ हो गयी और आरजीवाई योजना के बल्ब बिकने लगे। जब काउंटरों पर खराब बल्ब बदला नहीं गया तो मामले का खुलासा हुआ।