प्रो. प्रवेश ने बताया कि अगर इतिहास में संशोधन की बात कीजिए तो दक्षिणपंथी होने का आरोप लग जाता है। कम से कम इतिहास का नया दृष्टिकोण सामने आने तो दीजिए, इसके बाद विरोध कीजिए। सिर्फ प्राचीन इतिहास में ही नहीं, आधुनिक इतिहास में भी बदलाव की जरूरत है। अगर मध्य काल की बात करें तो अकबरनामा जैसे लिखा है, उसे वैसे ही सही मानते हैं, लेकिन जब हर्षचरित की बात आती है तो परीक्षण करने को कहा जाता है। यह कहां तक सही है? उन्होंने कहा कि आधुनिक इतिहास में शिवाजी के बारे में बहुत कम पढ़ाया जाता है, उसे और विस्तृत किया जाना चाहिए।