मुआवजा राशि कहां खपी, बैंक शाखा से मिले खाते के स्टेटमेंट से खुला राज
बरेली। दस माह पहले अपात्र महेशपुर ठाकुरान गांव की भगवान देई को विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एसएलएओ) कार्यालय से 1.13 करोड़ रुपये बतौर मुआवजा मिल गए। महिला ने आनन-फानन में खुद के साथ ही अपने तीन बेटों के विभिन्न बैंकों में खुले खातों में धनराशि ट्रांसफर कर दी। कुछ रकम बेटों को चेक से भी दे दी। इस तरह उसने खाते से कुल 1.33 करोड़ रुपये निकाल लिए। अब उसके खाते में सिर्फ 6,008 रुपये बचे हैं। ये खुलासा बीसलपुर की एक्सिस बैंक शाखा से प्राप्त खाते के स्टेटमेंट से हुआ है। यह फर्जीवाड़ा तहसीलदार सदर की गलत रिपोर्ट पर हुआ है।
स्टेटमेंट के मुताबिक, भगवान देई ने सर्वाधिक 73,27,111 रुपये बेटे रंजीत सिंह के खाते में ट्रांसफर किए हैं। यह धनराशि 19 चरणों में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में खुले खाते में ट्रांसफर की गई है। दूसरे बेटे रवि के पंजाब नेशनल बैंक के खाते में दो बार ऑनलाइन तो दो बार चेक से 38.57 लाख रुपये भेजे गए हैं। तीसरे बेटे सुभाष के खाते में भी चार बार में 1.30 लाख रुपये भेजे गए हैं। खुद भगवान देई ने 13 मई 2025 को दो चरण में 20 लाख रुपये की निकासी की है। 17 मार्च 2025 को भगवान देई के खाते में मुआवजे के 1.13 करोड़ रुपये आए थे। चार दिसंबर 2025 तक भगवान देई के खाते से पूरी रकम निकल गई। इस दौरान अफसर कुछ समझ ही नहीं सके। शिकायत पर एसएलएओ ने 21 नवंबर 2025 को भगवान देई के विरुद्ध आरसी (वसूली प्रमाण पत्र) जारी किया था। संवाद
बिचौलियों को कितनी रकम दी, ये राज खुलने बाकी
बताया जा रहा है कि बैंक स्टेटमेंट के आधार पर अब तहसील प्रशासन ने कार्रवाई तेज कर दी है। रुपये कहां खपाए गए, इसकी जांच के लिए एलडीएम से रवि, सुभाष और रंजीत सिंह के भी बैंक खातों का विवरण मांगा गया है। इसके बाद ही यह साफ होगा कि फर्जीवाड़े की रकम कहां-कहां खपाई गई है। राज खुलने पर बिचौलियों अर्थात भगवान देई को फर्जी तौर से मुआवजा दिलाने वालों के नाम भी सामने आने की उम्मीद है।
रिंग रोड प्रोजेक्ट में भगवान देई को मिली खैरात
भगवान देई को झुमका चौराहे से रजऊ परसपुर तिराहे तक बन रही रिंग रोड के लिए जमीन अधिग्रहण में फर्जी तौर पर मिले मुआवजे का खुलासा अमर उजाला ने सात जनवरी को किया था। इसके बाद कलक्ट्रेट से सदर तहसील तक के अधिकारियों के बीच खलबली मची है और कार्रवाई भी गति पकड़ गई है।