नगर आयुक्त शीलधर सिंह यादव के कृपापात्र पर्यावरण अभियंता उत्तम कुमार वर्मा ने तीन साल में जितने भी बड़े प्रोजेक्ट संभाले सब फ्लाप चल रहे हैं। बावजूद इसके उनको स्वास्थ्य विभाग जैसा एक और मलाईदार महकमा देने के लिए नगर स्वास्थ्य अधिकारी डा. अशोक कुमार को झटके में रिलीव कर दिया गया।
नगर निगम में उत्तम कुमार वर्मा की तैनाती यहां फरवरी 2014 में हुई थी। तत्कालीन नगर आयुक्त उमेश प्रताप सिंह ने इनको सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का चार्ज सौँपा था। तबसे प्लांट लगातार बंद चल रहा है। पर्यावरण अभियंता प्लांट चालू कराने के लिए न तो न्यायालय में ठीक से पैरवी कर पाए और न ही लीचेड ट्रीटमेंट लगवाकर प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) से एनओसी ले पाए। नर्सिंग होम और अस्पतालों से रोजाना निकलने वाले बायोवेस्ट के निस्तारण के लिए लगा एक सिनर्जी प्लांट डेढ़ साल से बंद है। चार सौ से ज्यादा अस्पतालों का बायोवेस्ट कहां जा रहा ये कोई नहीं जानता।
गांधी उद्यान के इंचार्ज भी उत्तम वर्मा हैं। उनकी इंचार्जी में उद्यान से डेढ़ दर्जन से ज्यादा शीशम, आम, जामुन के पेड़ काटकर आरा मशीनों पर बेच दिए गए। ठेकेदार और माली के बीच पेड़ काटकर गेट से बाहर ले जाने और बेचने की ऑडियो भी वायरल हुआ। अपर नगर आयुक्त ने पूरे मामले की जांच की। मगर, जांच रिपोर्ट पर कोई कार्रवाई नहीं हुई। दो अक्टूबर 2015 में शहर को गंदगी मुक्त करने के लिए शुरू हुई डोर टू डोर कूड़ा योजना ठेकेदारों की मनमानी की शिकार है। पर्यावरण अभियंता की रिपोर्ट पर ठेकेदार छह करोड़ का खर्च दर्शाकर पेमेंट भी करा चुके हैं जबकि शहर में कूड़ा नियमित नहीं उठ पा रहा है। बोर्ड और कार्यकारिणी में भी डोर टू डोर की नाकामी साबित हुई है। इलाहाबाद से आई ऑडिट टीम ने भी अपनी रिपोर्ट में ठेकेदारों को लखनऊ नगर निगम के मुकाबले डेढ़ करोड़ से ज्यादा घपले का उल्लेख किया था। लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।
ये प्रोजेक्ट भी फ्लाप चल रहे हैं
1- निर्माण के अतिरिक्त चार्ज में वार्डों में सड़क और नाली निर्माण के 33 करोड़ के कामों में भारी अनियमितताएं हैं। ज्यादातर काम अधूरे पड़े हैं तो बहुत से कामों की फाइल लंबे समय से लटकी हैं।
2- शहर को पॉलीथिन मुक्त बनाने का अभियान चार से छह दिन चलकर फ्लाप हो गया।
3- स्वच्छ भारत मिशन में डेढ़ करोड़ से ज्यादा का बजट मिल चुका है। 70 फीसदी शौचालय बने नहीं हैं। जो बने हैं, वह अधूरे पड़े हैं।
4- पर्यावरण अभियंता के तौर पर पार्कों में संचार कंपनियों से मिलकर मोबाइल टॉवर लगवाने का प्रस्ताव कार्यकारिणी के एजेंडे में शामिल करा दिया। हालांकि ये प्रस्ताव अभी लंबित है।
उत्तम वर्मा से कई चार्ज ले लिए गए हैं। अब उनका काम कम है। निर्माण के काम एक्सईएन देख रहे हैं। नगर स्वास्थ्य अधिकारी का पद भी सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए होता है। डा. अशोक कुमार ने खुद कहा तभी उनको रिलीव किया गया। शीलधर सिंह यादव, नगर आयुक्त
रामपुर के चक्कर में हटे डॉ अशोक
रामपुर में मुख्यमंत्री कार्यक्रम के लिए सफाई कर्मियों की जरूरत पड़ी तो बरेली नगर निगम से 50 कर्मचारी भेजने का मौखिक आदेश मिला। कुछ भेज भी दिए लेकिन न तो नगर आयुक्त और न ही अधीनस्थ कर्मचारियों ने नगर स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. अशोक कुमार को इसकी जानकारी दी। अतिरिक्त कर्मचारी भेजने की बात आयी तो उनसे पूछा गया। जब उन्होंने बताया कि उन्हें तो खबर ही नहीं है तो उन्हें कार्यमुक्त कर दिया गया।
बुखारपुरा के पार्षद रूपेंद्र पटेल ने बताया कि उनके यहां दो कर्मचारी तीन दिनों से अनुपस्थित चल रहे हैं। पता चला कि वे रामपुर के चक्कर लगा रहे हैं। सनसिटी के पार्षद डॉ. अजय सक्सेना को दो कर्मचारी तीन दिनों से नहीं दिख रहे हैं। सफाई कर्मचारी नगर स्वास्थ्य अधिकारी के अंडर में है उनसे वजह पूछी गई पड़ताल हुई। पता चला कि नगर स्वास्थ्य अधिकारी से बिना बताए करीब 10 सफाई कर्मचारी और एक जेसीबी भी वहां भेज दी गई। वहां जब और कर्मचारी बुलवाए गए तो नगर आयुक्त ने नगर स्वास्थ्य अधिकारी से पूछा। उन्हाेंने बता दिया कि मुझे तो पता ही नहीं। इसी दौरान बात बढ़ी तो डॉ. अशोक कुमार ने खुद को रिलीव करने की पेशकश कर दी और नगर आयुक्त ने तुरंत रिलीव कर भी दिया।
मुझसे बिना पूछे ही 16 सफाई कर्मचारी रामपुर भेज दिए गए। मुझे इसकी जानकारी ही नहीं थी। बाद में नगर आयुक्त से मुझे पता चला कि रामपुर और भी कर्मचारी भी भेजने है। इसके चलते बात बढ़ गई।
डॉ. अशोक कुमार, पूर्व नगर स्वास्थ्य अधिकारी