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निगम के लिए बेस्ट लेकिन पर्यावरण के लिए खतरनाक है ट्रंचिंग ग्राउंड

Wed, 26 Jul 2017 12:58 AM IST
बरेली
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अखा-ढका गांव के पास ट्रंचिंग ग्राउंड और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट की तैयारी की भनक लगते ही विरोध की हलचल बढ़ गई है। आसपास के दर्जनों गांव के लोगों ने इस पर आपत्ति जताई है। रामगंगा नदी के समीप इस जमीन को गांव के लोग उपजाऊ बता रहे हैं। उनका कहना है कि रामगंगा उनके लिए आस्था का केंद्र है और उसके पास कूड़ा घर संभव नहीं। 
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बभिया की जमीन रिजेक्ट होने के बाद निगम के लिए जमीन ढूंढना अभी भी टेढ़ी खीर है। काफी खोजबीन के बाद अखा गांव के पास करीब 14 हेक्टेयर जमीन देखी गई है। निगम प्रशासन इसे बिल्कुल मुफीद बता रहा है जबकि पर्यावरण के लिए लोग खतरनाक बता रहे हैं। पर्यावरण विशेषज्ञाें का भी कहना है कि जमीन से भले ही रामगंगा नदी की दूरी दूर है लेकिन इसका कूड़ा अगर किसी भी तरह नदी में मिला तो यह वाकई खतरनाक होगा। जहां कूड़ा डाला जाएगा वहां उसको निस्तारित करने के अच्छे इंतजाम होने चाहिए। कुछ खतरनाक गैसें और कूड़े की दुर्गंध ही आसपास के लोगाें का रहना मुश्किल कर देगा। अखा गांव के ऋषिपाल सिंह कहते हैं कि नगर निगम अगर धार्मिक स्थल या किसी और कार्य के लिए जमीन लेगा तो जरूर देंगे लेकिन कूड़ा फेंकने के लिए जमीन नहीं दे सकते हैं।
विरोध के लिए शुरू हो गई बैठक 
क्षेत्रिय चेतना विकास समिति ने बदायूं रोड स्थित गंगानगर कालोनी में बैठक करके इस जमीन का विरोध किया है। संरक्षक अशोक कुमार सिंह, राजेंद्र सिंह चौहान, जेपी सिंह, सुखवीर सिंह, यदुवीर सिंह, एमपी सिंह समेत तमाम लोगाें का कहना है कि यह जमीन प्रधानमंत्री की नमामि गंगे योजना के पूरी तरह विपरीत है। पुल बनने व बांध बनने से लोगाें के स्नान और पूजा करने का स्थान वैसे ही कम हो गया है ऐसे में जब ट्रंचिंग ग्राउंड बनेगा तो गंगा और प्रदूषित होगी। समिति के लोगों ने कहा कि यह एक उपजाऊ भूमि है जबकि ट्रंचिंग ग्राउंड के लिए बंजर जमीन होनी चाहिए।  
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- पर्यावरण के लिए क्यों है जमीन खराब 
जहां बनेगा ट्रंचिंग ग्राउंड उसके आसपास आठ गांव 
रामगंगा नदी से जुड़ी है गांव के लोगों की आस्था 
सिंचाई विभाग के बंधे से होकर जाते हैं कई लोग 
रामगंगा से अगर मिला कूड़ा हो सकता है खतरनाक 

- कुछ ऐसा होना चाहिए ट्रंचिंग ग्राउंड, बाकरगंज कूड़ा फेंकने लायक नहीं
बाकरगंज कूड़ा फेंकने लायक नहीं बचा है। डंपिंग ग्राउंड संबंधी मानकों की माने तो एक ही स्थान पर 30 साल से अधिक कूड़ा डंप नहीं कर सकते हैं। तकरीबन 27 साल से यहां कूड़ा डाल रहे हैं। एक साइंटिफिक सेनेंट्री लैंड फिल साइट यानी कूड़ा निस्तारण स्थल को अगर विधिवत रूप से बनाया जाए तो इसमें कूड़े से भूमिगत जल दूषित न हो, इसके इंतजाम होते हैं। चारो ओर बाउंड्री होनी चाहिए। आसपास पर्यावरण और हरियाली हो साथ ही यहां से निकलने वाले गंदे पानी को शुद्ध करके प्रयोग में लाने के लिए लीचेड ट्रीटमेंट प्लांट होना जरूरी है। 
 


पर्यावरण विशेषज्ञ बोले--- फोटो 

- जैसा की बताया जा रहा है कि रामगंगा प्रस्तावित ट्रंचिंग ग्राउंड जमीन से तीन किलोमीटर दूर है तो यह अच्छी दूरी है। लेकिन यह ध्यान रखना जरूरी है कि कूड़ा यहां से बाहर न निकले और नदी में न मिले। कूड़े का निस्तारण होना जरूरी है। यहां से निकलने वाली गैस और दुर्गंध जरूर गांव के लोगों को इफेक्ट करेगी। कुछ जगहाें पर अच्छी तरह से कूड़े को निस्तारित करते हैं लेकिन शायद यहां ऐसा न हो पाए। कूड़ा ढंग से डिस्पोज हो इसका ध्यान रखना जरूरी है। 
प्रो. नीलिमा गुप्ता, पर्यावरण विशेषज्ञ, रुहेलखंड विश्वविद्यालय 

- सॉलिड वेस्ट रूल 2000 के मुताबिक कुछ नियम हैं जो ट्रंचिंग ग्राउंड और सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट बनाते समय ध्यान रखना जरूरी है। इसके अलावा जहां कूड़ा डंप किया जाए उसे बनाने का तरीका भी काफी अलग है। जहां निगम की प्रस्तावित जमीन है उसे देखे बिना कुछ कह पाना मुश्किल है। रामगंगा नदी अगर तीन किलोमीटर दूर है लेकिन ट्रंचिंग ग्राउंड का कुछ भी हिस्सा उससे मिलता है तो वह आगे चलकर खतरनाक हो सकता है। गांव वालों के लिए तो दिक्कत होगी ही। 
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प्रो. डीके सक्सेना, पर्यावरण विशेषज्ञ, बरेली कॉलेज 
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