बरेली। अपनी रकम पाने में ही तमाम बीएड कॉलेज लापरवाही कर रहे हैं। इस वजह से 600 से ज्यादा बीएड कॉलेजों को उनमें एडमिशन लेने वाले छात्र-छात्राओं की फीस नहीं दी जा सकी है। विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रार डॉ. सुनीता पांडेय ने कॉलेजों से कहा है कि वे शीघ्र अपना डिमांड ड्राफ्ट भेजें, ताकि उन्हें फीस का भुगतान किया जा सके।
इस बार बीएड की राज्य स्तरीय प्रवेश प्रक्रिया कराने की जिम्मेदारी रुहेलखंड विश्वविद्यालय को दी गई थी। इस प्रवेश प्रक्रिया के दौरान प्रदेश भर के 2436 बीएड कॉलेजों में छात्र-छात्राओं ने एडमिशन लिए थे, लेकिन फीस विश्वविद्यालय के खाते में ही जमा की गई थी। एडमिशन प्रक्रिया पूरी होते ही तमाम कॉलेजों ने विश्वविद्यालय पर यह फीस उनके अकाउंट में भेजने का दबाव बनाना शुरू कर दिया था। लेकिन जब विश्वविद्यालय ने प्रक्रिया शुरू की तो कॉलेज लापरवाही करने लगे। अब तक करीब 1800 कॉलेजों ने ही विश्वविद्यालय को अपना डिमांड लेकर भेजा है, जिसके चलते 600 से ज्यादा कॉलेजों की फीस विश्वविद्यालय के खाते में ही जमा है। इसको लेकर विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रार डॉ. सुनीता पांडेय ने सभी कॉलेजों को सूचना जारी की है कि वे अपना अपना डिमांड लेटर विश्वविद्यालय को शीघ्र उपलब्ध कराएं। प्रवेश परीक्षा के राज्य समन्वयक प्रो. बीआर कुकरेती ने बताया कि कॉलेजों को डिमांड लेटर के साथ ही जिस खाते में धनराशि ट्रांसफर की जानी है, उसका एक कैंसिल चेक भी भेजना होगा।