... जब स्कूटर से पहुंचे नामांकन करने
डॉ. दिनेश जौहरी अकेले स्कूटर से नामांकन कर आए थे। इसके बाद पार्टी संगठन ने बैठक की थी। इसमें तय हुआ कि शहर विधानसभा से डॉ. दिनेश जौहरी चुनाव लड़ेंगे। खुद राजकुमार अग्रवाल ने भी इस पर सहमति दे दी और अपना नामांकन वापस ले लिया था। इसके बाद राजकुमार अग्रवाल ने सुबह चार बजे अपने आवास पर बैठक कर डॉ. दिनेश जौहरी को तिलक लगाकर समर्थन दिया। इस तरह 1985 में चुनाव जीतकर वह पहली बार विधायक बने थे। इसके बाद 1989 में दूसरी बार और 1991 में जीत की हैट्रिक लगाई थी।
नहीं मिला टिकट तो छोड़ दी थी भाजपा
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी, पूर्व उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी और विजयराजे सिंधिया का सानिध्य पा चुके डॉ. दिनेश जौहरी 1991 में कल्याण सिंह की सरकार में स्वास्थ्य मंत्री बने, मगर कल्याण सिंह के साथ मतभेद होने के चलते उन्हें सरकार से अलग होना पड़ा।
1993 में फिर चुनाव हुए तो पार्टी ने उनके बजाय राजेश अग्रवाल को टिकट दे दिया। इसी दौरान उन्होंने भाजपा छोड़ दी और मुलायम सिंह यादव से संपर्क कर सपा में चले गए। मगर बाद में बंटवारे में शहर सीट कांग्रेस के खाते में चली गई। कुछ समय बाद उनकी वापसी फिर भाजपा में हुई।
अटल बिहारी वाजपेयी के पीछे खड़े डॉक्टर दिनेश जौहरी
कोरोना काल में लगवाए थे 100 से अधिक कैंप
वह राजनीतिक रूप से भले सक्रिय नहीं थे मगर सामाजिक गतिविधियों में उनकी सक्रियता हमेशा रही। कोरोना काल में डॉ. दिनेश जौहरी ने लोगों की मदद के लिए 100 से अधिक स्वास्थ्य शिविर लगवाए थे। उन्होंने लोगों के खानपान की व्यवस्था भी की थी। लोगों का निशुल्क चेकअप कर दवाएं भी वितरित की जाती थीं।
1984 में खोला था कारसेवक भर्ती केंद्र
भाजपा के महानगर उपाध्यक्ष अरुण कश्यप ने बताया कि डॉ. दिनेश जौहरी भाजपा में आने से पहले संघ से प्रभावित थे। राम जन्मभूमि आंदोलन के दौरान 1984 में उन्होंने अपने आवास में कारसेवक भर्ती केंद्र की स्थापना की थी। उस समय सैकड़ों लोग पंजीकरण कराकर अयोध्या पहुंचे थे।
मुख्यमंत्री के दावेदार के रूप में भी उभरे
1991 में भाजपा की सरकार बनी थी। वीरेंद्र अटल बताते हैं कि कल्याण सिंह मुख्यमंत्री बने थे पर उसके छह माह बाद ही कई जगह से डॉ. दिनेश जौहरी को मुख्यमंत्री बनाने की मांग होने लगी थी। उस समय 25-30 विधायक भी लखनऊ में इकट्ठा हुए थे।