बरेली। ब्लाक प्रमुखी के चुनाव में प्रत्याशियों ने पैसे खर्च कर पढ़े लिखों से उनका अक्षर ज्ञान छीन लिया और आंखों वालों की नजर। ज्यादातर मामले सपा के नेताओं के ही थे इसलिए अफसरों ने सपा के लोकल आकाओं के आगे माथे नवा लिए, समेडिकल सर्टिफिकेट फटाफट बन गए। कायदे से अनपढ़, अक्षम और अंधे वोटर को उसके परिवार की ही सदस्य हेल्पर के रूप में मिलना चाहिए लेकिन यहां प्रत्याशी ने जिसे चाहा उसे बना दिया। बेरली और आसपास के तीन जिलों में 416 बीडीसी सदस्य अपने वोट डालने के काबिल नहीं पाए गए। कई जगह अफसरों ने अपनी अफसरी की लाज बचाने की कोशिश न की होती तो ये संख्या दो हजार से ऊपर जाती।
पीलीभीत की बीसलपुर तहसील में 84 में 74 तो बदायूं के सालारपुर में 84 में से 60 के लिए हेल्पर मांगे गए थे। बिथरी में अनपढ़ राममूर्ति देवी को लगा कि उनका वोट उनका पति बेचने जा रहा है तो उन्होंने अंदर जाकर पर्चे पर खुद ही एक लिख कर वोट डाल दिया और ये वोट वैलिड था। राममूर्ति के पति कालीचरण कई दिन से सपा प्रत्याशी के साथ थे। उन्होंने अपने बेटे को हेल्पर के तौर पर मांगा लेकिन पति को दे दिया। राममूर्ति ने कह दिया मैं इन्हें नहीं जानती।
बरेली के चार ब्लाकों में हुए प्रमुखी के चुनाव में कुल 95 बीडीसी सदस्यों को हेल्पर दिए गए। अधिकांश सदस्यों का हेल्पर प्रत्याशियों ने अपने चेहतों को बनवाया। अफसरों ने भी सदस्यों के शपथपत्र और घोषणापत्र लेकर काम कर दिया।
पीलीभीत के सात ब्लाक में सिर्फ तीन में मतदान हुआ, जिसमें 253 बीडीसी सदस्यों ने हेल्पर के लिए आवेदन किया। इसमें किसी ने नजर कमजोर होने की समस्या बताई तो किसी ने निरक्षर होने की। कुल 71 सदस्यों को निरक्षरता के आधार पर हेल्पर की अनुमति दी गई थी। पूरनपुर ब्लाक में 274 सदस्यों में से 127 ने हेल्पर मांगा, 31 स्वीकृत हुए। बीसलपुर में 84 में 74 ने मांगा, 19 को अनुमति मिली। बरखेड़ा के 89 सदस्यों में से 52 ने मांगा, जिसमें 21 को हेल्पर मिले।
बदायूं के सिर्फ सालारपुर ब्लाक में 84 में से 60 बीडीसी सदस्यों ने नजर कमजोर होने की शिकायत करते हुए हेल्पर के लिए आवेदन किया था। यहां सारा जुगाड़ सपा के विधायक कर रहे थे। अपनी अफसरी बचाने के लिए निर्वाचन अधिकारी ने तीन डाक्टरों के पैनल बनाया। पैनल ने सबसे हस्ताक्षर कराने को कहा। 30 ने कर दिए तो लोगों की समक्ष में बात आयी बाकी 30 ने कहा हमारी तो नजर कमजोर है। उन्हें अनफिट मान लिया गया था लेकिन अंतत सपा विधायक आठ हेल्पर पर ही मान गए।
लखीमपुर खीरी में प्रशासन ने 639 में 123 बीडीसी मेम्बरों को हेल्पर की अनुमति दी। मोहम्मदी विकास खंड में 21 बीडीसी सदस्यों को वोट डालने के लिए साथी की जरूरत पड़ी, जिनमें से चंचला देवी और सावित्री देवी हाईस्कूल और शमसुलनिशा जूनियर हाईस्कूल पास हैं, दूसरे से वोट डलवाने के लिए इन्होंने खुद को निरक्षर बताया था। निघासन में 42 बीडीसी सदस्यों को निरक्षर बता कर हेल्पर की अनुमति दी गई। यहां शिशुपाल और कल्पना प्राइमरी पास हैं। पसगवां में 24 बीडीसी सदस्यों को हेल्पर वोटर दिए गए थे, भाजपा केलोगों ने विरोध किया तो दो ही डाल पाए। यहां सपा हार गई।
शाहजहांपुर के 15 ब्लॉकों में से 127 सदस्य बूथ तक जाने लायक नहीं पाए गए उन्हें हेल्पर दिए गए। सब सपा के थे।
निर्वाचन आयोग से शिकायत
भदपुरा ब्लाक में हेल्पर लेने वाली नीलम रानी स्नातक हैं और आनंदपाल, वेदपाल, जागनलाल, जोरावर, देवेश कुमार, सतीश चंद्र भी अनपढ़ नहीं हैं। जमुना देवी कश्यप के हेल्पर अनिल गंगवार बनाए गए। वेदपाल यादव का हेल्पर टीकाराम गंगवार को और सरोज कुमारी यादव का हेल्पर महेंद्र पाल सिंह गंगवार को बनवाया गया। इसी तरह आनंदपाल कश्यप के हेल्पर रविंद्र कुमार गंगवार बनाए गए हैं। ममतादेवी, नीलमरानी, सुशीला देवी, सतीश कुमार, देवेश कुमार, जोरावर और जागन लाल को भी उनके परिवार के अलावा हेल्पर दिलाए गए। सपा के बागी प्रत्याशी नरोत्तमदास मुन्ना ने राज्य निर्वाचन आयोग को भेजी शिकायत में मनमाने ढंग से प्रत्याशी के खास लोगों को सदस्यों का हेल्पर बनाने की बात कही है।