बरेली। बार-बार पेशाब आए, प्यास ज्यादा लगे, सिरदर्द बना रहे, आंखों की रोशनी कम हो, चिड़चिड़ापन बढ़े, मौसम बदलने पर बीमार हों तो सतर्क हो जाएं। यह डायबिटीज के लक्षण हो सकते हैं। अव्यवस्थित जीवनशैली, मिलावटी खानपान से युवा और बच्चे भी चपेट में आ रहे हैं।
जिला अस्पताल एनसीडी क्लीनिक प्रभारी डॉ. मयंक गुप्ता के मुताबिक, ब्लड शुगर बढ़ने पर किडनी रक्त से अतिरिक्त शुगर फिल्टर नहीं कर पाती। शरीर में शुगर का स्तर बढ़ने से इम्यून सिस्टम कमजोर हो जाता है। इससे घाव भरने में समय लगता है। आसानी से रोगों के चपेट में आ जाते हैं।
बताया कि जिला अस्पताल समेत सभी सरकारी स्वास्थ्य केंद्रों पर शुगर की निशुल्क जांच होती है। इसलिए लक्षण दिखे तो जांच में कोताही न बरतें। समय से रोग का पता चले तो इलाज भी मुमकिन है। हालांकि देर होने पर धीरे-धीरे शरीर पर गंभीर रूप से दुष्प्रभाव होते हैं।
बताया कि परिवार में अगर किसी को डायबिटीज थी तो अगली पीढ़ी भी चपेट में आ सकती है। वहीं, असंतुलित भोजन, अनियमित जीवनशैली, हार्मोंस असंतुलन भी रोग की वजह हैं। विशेषज्ञ डाॅक्टर से दवा लेना और नियमित जीवनशैली, संतुलित आहार ही इससे बचाव का उपाय है। ब्यूरो
हृदयाघात, किडनी फेलियर, गैंगरीन की भी आशंका
निजी मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग प्रमुख प्रो. स्मिता गुप्ता के मुताबिक डायबिटीज का किडनी पर काफी असर पड़ता है। ब्लड में शुगर की खराब मात्रा कोलेस्ट्राल का स्तर असंतुलित करती है जो हृदय रोग की वजह है। इम्युन सिस्टम कमजोर होने से गैंगरीन की आशंका रहती है। एंडोक्राइनोलाॅजी डाॅ. श्रुति शर्मा के मुताबिक डायबिटीज जल्दबाजी से ठीक नहीं होती। दवा समेत जीवनशैली, खानपान में बदलाव जरूरी है।
बचाव के उपाय
- खाने में मीठे से परहेज करें या बेहद कम सेवन करें।
-आलू, चावल जैसे कार्बोहाइड्रेट भोजन करने से बचें।
- फाइबर और प्रोटीन की मात्रा भोजन में ज्यादा रखें।
- शुगर नियंत्रित रखें। शुगर और आंखों की जांच कराएं।
- वजन नियंत्रित रखें। नियमित व्यायाम, योग आदि करें।
- सुबह-शाम तेजी से टहलें। विटामिन डी की कमी न हो।
- फाइबरयुक्त सब्जियां, ताजे फल, साबुत अनाज खाएं।