मंडलायुक्त से मिला प्रतिनिधिमंडल
आर्किटेक्ट सुशील शौरी के साथ व्यापारिक संगठनों के पदाधिकारी विशाल सक्सेना, शोभित सक्सेना, अनिल अग्रवाल, रोहित जिंदल ने मंगलवार को मंडलायुक्त सौम्या अग्रवाल से मुलाकात की। अपना पक्ष रखा। विशाल सक्सेना के मुताबिक मंडलायुक्त ने जल्द न्याय दिलाने का भरोसा दिया है।
प्रकरण में कब क्या हुआ
- 29 जुलाई को मानचित्र स्वीकृत कराए बिना निर्माण कराने पर शोरूम को सील किया।
- 25 नवंबर को सुनवाई के बाद निर्माण को अवैध ठहराते हुए ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया।
- 27 नवंबर को सील तोड़कर दोबारा शोरूम संचालित करने की पुष्टि हुई।
- 27 नवंबर को बीडीए के जेई रमन कुमार ने प्रॉपर्टी की मालकिन कृष्णा सक्सेना और शोरूम संचालक रोहित शौरी के खिलाफ प्रेमनगर थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई।
- 30 नवंबर को कुछ व्यापारियों और बीडीए की टीम के बीच खींचतान हुई। दोनों पक्षों ने एक-दूसरे के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने के लिए तहरीर दी है।
शोरूम मालिक पहुंचे कोर्ट
सीलिंग पर संग्राम के बीच शोरूम मालिक रोहित शौरी ने कोर्ट की शरण ली है। उन्होंने अधिवक्ता के जरिये विशेष न्यायालय (भ्रष्टाचार निवारण) सीआरपीसी के तहत अर्जी देकर कार्रवाई की मांग की है। कोर्ट ने इस संबंध में प्रेमनगर थाने से रिपोर्ट तलब की है। रिपोर्ट आने के बाद अगली सुनवाई के दौरान कोर्ट यह निर्णय लेगा कि वाद दर्ज किया जाने योग्य है या नहीं।
UP: बदायूं में जामा मस्जिद या नीलकंठ महादेव मंदिर... दोनों पक्ष आमने-सामने, किए दावे; इस वजह से गरमाया मुद्दा
कोर्ट में दी गई अर्जी में शोरूम मालिक रोहित शौरी ने बीडीए अधिकारियों-कर्मचारियों समेत 20 से 25 अज्ञात लोगों पर भ्रष्टाचार व वसूली करने का आरोप लगाया है। कोर्ट में उनकी तरफ से दाखिल की गई अर्जी में बीडीए उपाध्यक्ष और सचिव के भी नाम शामिल हैं। इसमें पांच से लाख रुपये वसूली की कोशिश करने, मना करने पर व्यवसाय नहीं करने देने की धमकी देने का आरोप लगाया है।
अर्जी में बताया गया है शोरूम का व्यावसायिक मानचित्र स्वीकृत है। कब-कब बीडीए का कौन अधिकारी या कर्मचारी माैके पर पहुंचा और उसने कितने रुपयों की मांग की? इसका सिलसिलेवार ब्योरा दिया गया है।
जिनके भवन के ध्वस्तीकरण का आदेश जारी किया जा चुका है, वही लोग आरोप लगा रहे हैं। मैं पहले ही कह चुका हूं कि कोई भी एजेंसी जांच कर ले। अगर किसी कर्मचारी-अधिकारी ने गलत किया है तो उस पर कार्रवाई होनी चाहिए। सिर्फ आरोप लगाकर दबाव बनाने का प्रयास न करें। हम नियमानुसार कार्रवाई कर रहे हैं। अगर किसी व्यक्ति को बीडीए के किसी फैसले पर आपत्ति है तो वह कमिश्नर और हाईकोर्ट तक अपील कर सकता है। - मनिकंडन ए, उपाध्यक्ष बीडीए