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Bareilly News: हाईकोर्ट की फटकार पर बीडीए ने चुकाए 87.17 लाख रुपये, दो किसान भाइयों के खाते में आई रकम

Sat, 20 Sep 2025 12:14 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

बरेली के दो किसान भाइयों को हाईकोर्ट से न्याय मिला। हाईकोर्ट के आदेश पर बीडीए ने दोनों भाइयों को ब्याज के 87.17 लाख रुपये चुकाए। बीडीए ने इन किसानों की जमीन पर अधिग्रहण किया था। 
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मुकदमा जीतने के बाद एक साथ मौजूद कालीचरन व रामपाल - फोटो : संवाद
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विस्तार
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रामगंगानगर आवासीय योजना के लिए दो दशक पहले किसानों की जमीन लेने वाले बरेली विकास प्राधिकरण (बीडीए) को हाईकोर्ट में मुंह की खानी पड़ी है। उसे डोहरिया गांव के सगे भाइयों रामपाल व कालीचरन को ब्याज के 87.17 लाख रुपये चुकाने पड़े हैं। दोनों भाइयों की कृषि योग्य जमीन लेकर बीडीए ने 17 साल बाद उनको 96.71 लाख रुपये मुआवजा दिया था। इस पर अब मोटा ब्याज चुकाना पड़ा है। बीडीए की इस कार्यशैली से जहां सरकार की छवि धूमिल हुई। शासन को आर्थिक झटका भी लगा है।

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इलाहाबाद हाईकोर्ट के न्यायमूर्ति मनोज कुमार गुप्ता और क्षितिज शैलेंद्र की खंडपीठ से दो जनवरी 2024 को पारित आदेश का समय रहते अनुपालन नहीं करने पर बीडीए और विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी (एसएलएओ) को न्यायिक अवमानना का सामना करना पड़ा है। 21 अगस्त 2025 को अवमानना वाद दाखिल हुआ तो आनन-फानन बीडीए ब्याज की भरपाई के लिए तैयार हो गया। 

एसएलएओ दफ्तर पहुंचा दिया चेक 
वाद की सुनवाई के लिए नियत तिथि से एक दिन पहले 10 सितंबर को ही 87,17,548 रुपये का चेक काटकर एसएलएओ दफ्तर पहुंचा दिया। साथ ही, धनराशि अदा करने का हलफनामा हाईकोर्ट में प्रस्तुत कर दिया। हाईकोर्ट की सिंगल बेच ने 11 सितंबर को सुनवाई करते हुए आदेश का अनुपालन सुनिश्चित करने और हलफनामा दायर करने के लिए एसएलएओ को दो सप्ताह का मौका दिया है। अब 25 सितंबर को इसकी सुनवाई होगी। 
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इधर, हाईकोर्ट की नाराजगी देख एसएलएओ ने बीडीए की तरफ से मिले चेक को भारतीय स्टेट बैंक की मुख्य शाखा के प्रबंधक भेजकर वादी पक्ष को भुगतान करने की तैयारी तेज कर दी है। कालीचरन के बेटे सुनील ने बताया कि हाईकोर्ट से उनको न्याय मिला है। इससे उनका परिवार बेहद खुश है। पिता और चाचा के बैंक खाते में ब्याज की धनराशि आ गई है। 

विवश होकर 17 साल बाद लिया था मुआवजा
रामपाल ने बताया कि उनके तीनों भाइयों की जमीन दिसंबर 2005 में बीडीए ने कब्जे में ले ली थी। वह 165.51 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से मुआवजा दे रहा था, जबकि उनकी जमीन 2016 में अवार्ड हुई थी। वह मुआवजा राशि लेने के लिए तैयार हुए तो बीडीए ब्याज देने के लिए राजी नहीं हुआ। इस पर रामपाल व कालीचरन ने मार्च 2016 में हाईकोर्ट में बीडीए के विरुद्ध वाद दाखिल कर मुआवजे की रकम पर ब्याज की मांग की थी। 

दो जनवरी 2024 को हाईकोर्ट ने उनके पक्ष में फैसला सुना दिया था, जिसे बीडीए और एसएलएओ मानने के लिए तैयार नहीं थे। इस कारण उन्होंने एसएलएओ के विरुद्ध अवमानना वाद दाखिल किया था। तीनों भाइयों ने बीडीए से 17 साल तक मुआवजा स्वीकार नहीं किया। भूमिहीन होने से गरीबी झेलना मुश्किल हो रहा था तो वह बीडीए की शर्तों को स्वीकारने के लिए विवश हुए और 19 फरवरी 2022 को 96.71 लाख रुपये बतौर मुआवजा ले लिया था।

आठ किसानों के 290 करोड़ बाकी
रामगंगानगर आवासीय योजना के लिए जमीन देने वाले 150 से अधिक किसान 19 साल बाद भी मुआवजा पाने के लिए कानूनी लड़ाई लड़ रहे हैं। लारा कोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक के आदेश हो चुके हैं, जिसे बीडीए मान नहीं रहा है। जानकारी के मुताबिक, आठ किसानों का बीडीए पर कुल 290 करोड़ ब्याज समेत मुआवजा बाकी है। इसमें देवेंद्र प्रताप व महेंद्र के मूलधन के 26.50 करोड़ और ब्याज समेत कुल 101.56 करोड़ रुपये बाकी हैं। 

ओम प्रकाश, रामप्रकाश व गुलशन देवी के ब्याज समेत कुल 12.57 करोड़ रुपये मुआवजा बाकी है। पार्वती आदि के 12.11 करोड़, जाकिरा खान के 51.33 करोड़ और फैज उल्ला खान के 113 करोड़ रुपये बीडीए पर बाकी हैं। इन लोगों ने लारा कोर्ट में वाद दाखिल कर यह राशि दिलाने की मांग की है।
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बीडीए उपाध्यक्ष व सचिव नहीं दे रहे जवाब
किसानों के जुड़े मामलों पर पक्ष जानने के लिए बीडीए उपाध्यक्ष डॉ. मनिकंडन ए और सचिव वंदिता श्रीवास्तव के मोबाइल फोन पर कई बार संपर्क किया गया, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
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