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बीडीए बोर्ड की बैठक: ‘सड़क-गलियां बनीं नहीं तो 60 करोड़ कहां उड़ा दिए’

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बीडीए बोर्ड की बैठक में डीएम और कमिश्नर। - फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, बरेली
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सदस्यों ने कहा- नक्शा-कपांउंडिंग से होने वाली आय से सड़क-गलियां बनानी थीं
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बोर्ड की पिछली बैठकों के प्रस्तावों की अनुपालन आख्या न मिलने पर हंगामा

बरेली। साठ करोड़ की आय को कहां खर्च किया गया, बीडीए बोर्ड की बैठक में सदस्यों के इस सवाल का अफसर जवाब ही नहीं दे पाए। सदस्यों ने यह कहकर अफसरों को और घेरा कि 60 करोड़ की इस धनराशि से शासनादेश के मुताबिक सड़कों-गलियों का निर्माण होना था जो जो कहीं बनी नहीं दिख रहीं। इस बात पर भी हंगामा किया कि पिछली बैठक में आपत्ति के बाद बावजूद इस बार भी बीडीए अफसरों ने पिछली चार बैठकों में पास हुए प्रस्तावों की अनुपालन आख्या से अवगत नहीं कराया है जिसकी वजह से पता ही नहीं चल रहा है कि इन प्रस्तावों पर अमल भी हुआ है या नहीं।
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आयुक्त सभागार में बीडीए अध्यक्ष कमिश्नर रणवीर प्रसाद की अध्यक्षता में हुई बैठक में राजेश अग्रवाल, सतीश चंद्र समेत कई सदस्यों ने अधूरा एजेंडा देने पर कड़ी नाराजगी जताते हुए सवाल किया कि पहले की चार बैठकों में पारित प्रस्तावों के अनुपालन की जानकारी क्यों नहीं दी जा रही। सदस्यों ने कहा कि बीडीए की 2018-19 में नक्शों और कंपाउंडिंग से 50.53 करोड़ की आय हुई थी। इसमें सिर्फ 20.11 करोड़ खर्च हुए हैं। जनवरी 2020 तक इस मद में 36.91 करोड़ की और कमाई हुई है। इसमें से भी सिर्फ 17.26 करोड़ का व्यय दर्शाया गया है। इस तरह बीडीए को दूसरी मदों में हुई आय मिलाकर करीब 60 करोड़ की बचत हुई है। शासनादेश के मुताबिक इस धनराशि ने नए विकसित इलाकों में सड़क-गली और नालियों के निर्माण कराना चाहिए था लेकिन ये काम कहीं नहीं दिखाई दे रहे। उन्होंने शक जताया कि इस धनराशि को आवासीय प्रोजेक्ट चमकाने में खपा दिया गया है। सदस्यों ने अगली बैठक में इसका पूरा ब्योरा देने की मांग की है। मीटिंग में डीएम नितीश कुमार, बीडीए उपाध्यक्ष दिव्या मित्तल, नगर आयुक्त अभिषेक आनंद, टाउन प्लानर निर्विकार, बोर्ड सदस्य आर्येेंद्र अरोरा, नरेश शर्मा सहित कई लोग मौजूद रहे।

सस्ते आवासों के लाभार्थियों के लिए 30 मीटर चौड़ी सड़क क्यों

अफसरों ने यह प्रस्ताव रखा कि प्रधानमंत्री आवास योजना में बीडीए की रामगंगानगर आवासीय परियोजना के सेक्टर-एक में 254 आवासों का निर्माण कराया जा रहा है। यहां 24 मीटर सड़क और सेक्टर चार में 30 मीटर चौड़ी सड़क बनाई जानी है। सेक्टर चार में बने ओवरहेड टैंक से सेक्टर एक तक वाटर सप्लाई होनी है। इस काम में 1385 मीटर चौड़ी रोड करीब 842.22 लाख से और वाटर सप्लाई 9.29 लाख रुपये से होना है। दोनों कामों के लिए 852 लाख की धनराशि का प्रस्ताव शासन को भेजा जा चुका है। सदस्यों ने आपत्ति जताई कि सस्ते आवासों में रहने वालों के लिए 30 मीटर चौड़ी बनाने में करोड़ों खर्च करने का क्या औचित्य है। इसके बाद प्रस्ताव खारिज कर दिया गया।

करगैना परियोजना में तीन साल पुराने कब्जेदारों को मालिकाना हक

बीडीए ने वर्ष 1987 से 1991 के बीच में करगैना आवासीय परियोजना विकसित की थी। इसमें करीब सात सौ भवनों की रजिस्ट्री को लेकर मामला फंसा हुआ है। यहां बड़ी संख्या में अनाधिकृत आवंटी रह रहे हैं, जिन्होंने वर्षों से किस्त अदा नहीं है। इससे परियोजना को काफी नुकसान पहुंचा है। इससे यहां विकास कार्य भी नहीं हो पा रहे हैं। बोर्ड बैठक में यह प्रस्ताव पास हो गया कि यहां आवासों में तीन साल से काबिज लोगों के नाम बैनामा कर उन्हें मालिकाना हक दिया जाएगा।
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