बीडीए की दिक्कत- वर्षों पहले कॉलोनी बसाने वाले बिल्डरों को अब कहां ढूंढे
चिह्नित 149 अवैध कॉलोनियों को वैध करने की राह में नहीं अड़चन
बरेली। बीडीए 149 अवैध कॉलानियों को वैध करने की मुहिम चला रहा है। इसमें पहले चरण में उन कॉलोनियों को चिह्नित किया जा रहा है, जहां सड़क और पार्क सहित दूसरी जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं। इस प्रक्रिया में दिक्कत यह आ रही है कि वर्षों पहले इन कॉलोनियों को बसाने वाले बिल्डरों का अब कोई अता-पता नहीं है। ऐसी जगहों का ले-आउट पास कराने के लिए डेवलपमेंट चार्ज समेत बीडीए के दूसरे निर्धारित खर्च कॉलोनी में ही रहने वालों को झेलने होंगे।
शहर में बीडीए से मंजूरी लिए बगैर ही सैकड़ों अवैध कॉलोनियां बस चुकी हैं। हजारों अनाधिकृत बिल्डिंग भी खड़ी हो चुकी हैं। बीडीए के लिए इनका ध्वस्तीकरण कर पाना मुमकिन नहीं है, लिहाजा इन अवैध कॉलोनियों को वैध करने की कार्रवाई बीडीए कर रहा है। अधिकारियों का कहना है कि पहले उन कॉलोनियों को चिह्नित किया जा रहा है, जहां चौड़ी सड़कें और पार्क सहित अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध हैं और बीडीए के मानकों को काफी हद तक पूरा कर रही हैं। हालांकि ऐसी कॉलोनियों को वैध करने में समस्या यह है कि बीडीए से इनके ले-आउट पास कराने के लिए मोटी रकम का भुगतान करना होगा। चूंकि कॉलोनियों को बसाने वाले बिल्डरों को ढूंढ पाना अब मुमकिन नहीं है, लिहाजा बीडीए ने संबंधित कॉलोनी के लोगों को यह विकल्प दिया है कि वे ले-आउट पास कराने का खर्च मिलकर वहन करें। ले-आउट पास होने के बाद इन भवन स्वामियों को नक्शा पास कराने के लिए कंपाउंडिंग भी करानी होगी। इस पर भी अच्छा खासा खर्चा आएगा। ऐसे में तमाम अवैध कॉलोनियों को वैध करने की प्रक्रिया में अड़ंगा भी लग सकता है।
मानक पूरे करने वाली कॉलोनियों को बीडीए वैध कर रहा है लेकिन ले-आउट को पास कराने के लिए जो तय खर्च हैं, उन्हें संबंधित कॉलोनी के लोगों को मिलजुल कर ही वहन करना है, क्योंकि इन कॉलोनियों को बसाने वाले बिल्डरों से वर्षों बाद इसका खर्च ले पाना मुमकिन नहीं है। -दिव्या मित्तल, उपाध्यक्ष, बीडीए