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बैकफुट पर आईं तीन निर्माण एजेंसियां तो बीडीए ने खातों पर लगी रोक हटाई

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बीडीए वीसी ने लाभार्थियों को इंफ्रास्ट्रक्चर न देने पर 14 नवंबर को लगाई थी रोक
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आखिरकार निर्माण एजेंसी बिजली, पानी सहित दूसरी सुविधाएं देने को तैयार

बरेली। प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गरीबों के लिए सस्ते आवास बना रहे तीन निर्माण एजेंसियों के खातों पर लगी रोक हटा दी गई है। बीडीए वीसी ने तीन हफ्ता पहले कॉलोनियों में लाभार्थियों के लिए बिजली-पानी, सड़क जैसी जरूरी सुविधाओं पर बजट खर्च करने से हाथ खड़े करने पर खातों के संचालन पर रोक लगा दी थी। निर्माण एजेंसियों का कहना था कि उनका कांट्रेक्ट केवल आवास बनाकर देने का ही है। हालांकि अब वे कॉलोनियों में इंफ्रास्ट्रक्चर देने को राजी हो गई हैं। इसकी लिखित सहमति देने पर बीडीए ने उनके खातों को फिर से खोल दिया है।
गरीबों को ज्यादा से ज्यादा सस्ते आवास देने के लिए बीडीए को चार हजार प्रधानमंत्री आवास बनाकर देने हैं। बीडीए ने रामगंगा आवासीय योजना में 254 भवनों के निर्माण खुद कराए हैं। इसमें 224 का आवंटन भी हो चुका है। बाकी का लक्ष्य पूरा करने के लिए निजी निर्माण एजेंसियों को 2344 अवास बनाने का कांट्रेक्ट दिया गया था। इसमें एक बिल्डर को 364, दूसरे को 1500 और तीसरे को 480 आवासों का निर्माण करना हैै, लेकिन सस्ते आवास बनवा रहे बिल्डर्स और बीडीए के बीच यह पेच फंस गया कि आवासीय कॉलोनियों में बिजली-पानी, सड़क सहित दूसरे इंफ्रास्ट्रक्चर कौन पूरे कराकर देगा। निर्माण एजेंसियों का कहना था कि सरकार ने उन्हें केवल आवास बनाने का कांट्रेक्ट दिया है, जबकि बीडीए के अधिकारियों का कहना था कि बिल्डर्स को लाभार्थियों को जरूरी सुविधाएं भी मुहैया करानी हैं। इस पर सहमति न बनने पर बीडीए उपाध्यक्ष दिव्या मित्तल ने 14 नवंबर को तीनों निर्माण एजेंसियों के खातों के संचालन पर रोक लगा दी थी। इससे इन खातों में आवास बनाने के लिए शासन से जारी हुई करीब चार करोड़ की रकम डंप हो गई थी। इस कार्रवाई के बाद निर्माण एजेंसियों बैकफुट पर आ गए। उन्होंने बीडीए को यह लिखकर दे दिया है कि वे इंफ्रास्ट्रक्चर देने को तैयार है। इसके बाद बीडीए ने उनके खातों से रोक हटा दी है।
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प्रधानमंत्री आवास योजना में मकान बना रहे निर्माण एजेंसियां ने बुनियादी सुविधाएं देने के लिए तैयार हो गए हैं। इसके बाद उनके खातों का संचालन फिर से शुरू करा दिया गया है। आवास बनाने के टारगेट को जल्द पूरा किया जाना है। -दिव्या मित्तल, बीडीए वीसी
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