बरेली। रामगंगा आवासीय परियोजना के लिए किसानों की जमीन लेकर बीडीए आठ साल से उनका 60 करोड़ का मुआवजा दबाए बैठा है। अब एसएलएओ ने बीडीए सचिव को नोटिस भेजकर सभी किसानों को मुआवजे का भुगतान करने को कहा है, साथ ही इस बात को गलत भी बताया कि बीडीए की ओर से अपने मनमुताबिक कुछ किसानों को मुआवजा दे दिया गया है जबकि दूसरे किसानों को कोई ठीक जवाब तक नहीं दिया जा रहा है।
करीब आठ साल से लटकी इस आवासीय परियोजना के लिए बीडीए ने ग्राम डोहरिया, मोहनपुर उर्फ रामनगर, अहरौल व चंदपुर बिचपुरी के ग्रामीणों से करीब करीब 2.28 अरब की जमीन का अधिग्रहण किया था। बीडीए ने इस फरवरी तक किसानों को केवल 1.68 अरब रुपये का भुगतान किया है और 59.97 करोड़ का भुगतान बाकी है। विशेष भूमि अध्याप्ति अधिकारी यानी एसएलएओ मदन कुमार ने बीडीए की इस कार्यशैली पर असंतोष जताते हुए बीडीए सचिव को पत्र भेजा है कि भूमि अधिग्रहण के बाद 2015-16 में ही किसानों की जमीन बीडीए के नाम अमलदरामद हो गया है। भूमि अर्जन अधिनियम में यह कहीं भी उल्लेख नहीं है कि जमीन के उन्हीं गाटा संख्या का मुआवजा दिया जाए जिसका भुगतान खुद बीडीए करना चाहता है। यह नियमविरुद्घ है। एसएलएओ का कहना है कि जिन किसानों की जमीनों का अधिग्रहण किया गया है, उन सब को भुगतान किया जाए। एसएलएओ ने इसके लिए बीडीए सचिव को नोटिस देते हुए इसका स्पष्टीकरण मांगा है। बीडीए सचिव का कहना है कि बीडीए ने जितनी जमीन ली है, उन सभी किसानों को इसका भुगतान कर दिया गया है। जिन जमीनों पर अभी प्लाटिंग नहीं हुई है, वहां किसानों से कह दिया गया है कि वह उस जमीन पर खेती कर सकते हैं। इस संबंध में कोर्ट ने भी आदेश दिए हैं।
सभी किसानों को जमीन का मुआवजा मिलना चाहिए। इसके लिए बीडीए के सचिव से स्थिति को स्पष्ट करने के निर्देश दिए गए हैं। इसमें मामले को लेकर जल्द ही अग्रिम कार्रवाई भी की जाएगी। -मदन कुमार, एसएलएओ
किसानों को मुआवजा दिया जा रहा है। कोशिश की जा रही है कि दो से तीन महीने के अंदर बाकी किसानों को भी मुआवजा मिल जाए। एसएलएओ का नोटिस अभी मुझे नही मिला है। - दिव्या मित्तल, उपाध्याक्ष बीडीए