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हाईकोर्ट पहुंचा बीबीएल प्रबंधन, कहा- रद्द कराएं एफआईआर

Mon, 23 Apr 2018 06:53 PM IST
न्यूज डेस्क,अमर उजाला,बरेली
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फीस जमा न होने पर बच्चे का नाम काटने के मामले में थाना किला में रिपोर्ट दर्ज होने के बाद बीबीएल पब्लिक स्कूल के प्रबंधक ने राहत के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है। पुलिस की कार्रवाई को गलत ठहराते हुए स्कूल प्रबंधक सर्वेश अग्रवाल की ओर से याचिका दायर की गई है, जिसमें प्रमुख सचिव गृह, एसएसपी, इंस्पेक्टर किला और एफआईआर दर्ज कराने वाली अभिभावक सारिका आर्य को प्रतिवादी बनाया गया है। हाईकोर्ट में याचिका की लिस्टिंग हो गई है, मंगलवार तक इस पर सुनवाई होगी।
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ख्वाजा कुतुब निवासी सारिका आर्य का बेटा कक्षा सात में बीबीएल पब्लिक स्कूल में पढ़ता था। सारिका ने आरोप लगाया था कि उनके बेटे की 11 हजार रुपये की फीस जमा न होने के कारण स्कूल प्रबंधन ने उसका नाम काट दिया और उसे क्लास से निकालकर दिनभर भूखा-प्यासा लाइब्रेरी में बैठाए रखा। मेयर उमेश गौतम से शिकायत के बाद सारिका एसएसपी से मिलीं और इस मामले में स्कूल के प्रबंधक सर्वेश अग्रवाल एवं प्रधानाचार्य दीपक अग्रवाल के खिलाफ 18 अप्रैल को थाना किला में रिपोर्ट दर्ज कर ली गई। 
शनिवार को इस मामले में स्कूल प्रबंधक सर्वेश अग्रवाल ने हाईकोर्ट में याचिका दायर कराई है जिसमें, प्रमुख सचिव गृह, एसएसपी, इंस्पेक्टर किला और सारिका आर्य को प्रतिवादी बनाया है। इसमें उन्होंने गिरफ्तारी पर रोक लगाने की मांग करते हुए एफआईआर को रद्द करने की फरियाद की गई है।
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याचिका का आधार
अपनी याचिका में सर्वेश अग्रवाल ने कहा है कि सारिका का बेटा 19 फरवरी 2010 (नर्सरी) से 16 अप्रैल 2018 (कक्षा सात) तक उनके स्कूल में छात्र रहा। बच्चे की कक्षा छह की अक्टूबर, नवंबर, दिसंबर 2017 और जनवरी, फरवरी, मार्च 2018 की 11 हजार रुपये फीस बकाया थी। इसको लेकर अभिभावक को सूचित किया गया लेकिन फीस जमा नहीं हुई। बच्चे को जिस लाइब्रेरी में बैठाया गया, वह एअर कंडीशंड है इसलिए यह क्रूरता नहीं है।

पुलिस के सामने भी स्कूल प्रबंधन ने रखा पक्ष
स्कूल प्रबंधन ने किला थाने में दर्ज रिपोर्ट को लेकर पुलिस को अपना पक्ष भी दे दिया है। इसमें स्कूल प्रबंधन ने कहा है कि रिपोर्ट फर्जी तथ्यों के आधार पर लिखाई गई है। इसमें कहा गया है कि कक्षा छह पास करने के दौरान भी बच्चे की पूरी फीस जमा नहीं थी, इसके बावजूद स्कूल प्रबंधन ने उसका रिजल्ट जारी किया। आरोप लगाया है कि अभिभावक फीस जमा करने के बजाय अगली कक्षा में प्रवेश देने का दबाव बना रहे थे। जब स्कूल ने उनकी बात नहीं मानी तो देख लेने की धमकी दी गई और यह रिपोर्ट दर्ज करा दी। प्रबंधन ने रिपोर्ट में मनगढ़ंत आरोप लगाने की बात कही है।
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