भूमि अधिग्रहण में खर्च होगा कम बजट
परसाखेड़ा से टिसुआ तक आने वाले रूट पर बहुतायत में सरकारी जमीनें हैं। रामगंगा के आसपास भी सिंचाई विभाग, एनएचएआई, सेना और ग्राम पंचायतों की जमीनें हैं। ऐसे में इस रूट पर नई रेल लाइन बिछाने के लिए भूमि अधिग्रहण पर ज्यादा बजट खर्च नहीं करना होगा। दूसरी वजह यह भी है कि यहां बरेली होकर गुजरने वाली सभी रेल लाइनों और रिंग रोड को भी कनेक्टिविटी मिल जाएगी। रामगंगा से बमुश्किल 20 किलोमीटर पर भमोरा में औद्योगिक क्षेत्र का विस्तार भी प्रस्तावित है।
शहर को मिलेगा नया रेल गलियारा, औद्योगिक विकास की बढ़ेगी रफ्तार
बरेली के दिल्ली-गुवाहाटी हाई डेंसिटी नेटवर्क का हिस्सा बनने के बाद इसका असर केवल ट्रेनों की आवाजाही तक सीमित नहीं रहेगा। परसाखेड़ा औद्योगिक क्षेत्र, रिंग रोड, रामगंगा क्षेत्र और शहर के बाहरी हिस्सों के बीच नया रेल संपर्क विकसित होने से भविष्य के औद्योगिक और शहरी विस्तार के लिए नया परिवहन ढांचा तैयार होगा। इस परियोजना में बरेली जंक्शन के अलावा हापुड़, मुरादाबाद, रामपुर, शाहजहांपुर और सीतापुर के स्टेशनों को भी बाइपास किया जाएगा।
भिटौरा में कंटेनर डिपो का काम शुरु, स्टेशन पर बढ़ेंगी सुविधाएं
तीसरी और चौथी रेल लाइन परसाखेड़ा से भिटौरा होते हुए गुजरेगी। भिटौरा स्टेशन पर कंटेनर डिपो का काम शुरू हो चुका है। यहां फुट ओवरब्रिज व अन्य यात्री सुविधाओं का विकास भी प्रस्तावित है. नई लाइन पूरी तरह शहर के बाहर होने का सबसे बड़ा लाभ औद्योगिक क्षेत्र को होगा। जंक्शन पर ट्रेनों का दबाव भी कम होगा। 29.20 किलोमीटर लंबी रिंग रोड का निर्माण तेजी से चल रहा है।
मुरादाबाद मंडल के सीनियर डीसीएम महेश यादव ने बताया कि गाजियाबाद-सीतापुर के बीच तीसरी और चौथी रेल लाइन परियोजना पर तेजी से काम चल रहा है। सर्वे लगभग पूरा हो गया है। इसके बाद भूमि अधिग्रहण होना है। नई लाइनें परसाखेड़ा से रिंग रोड के समानांतर गुजरेंगी।