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बरेली से गायब हो गए नीली बत्ती वाले ठगो के गुर्गे

Sun, 22 Nov 2015 01:46 AM IST
बरेली
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बरेली। राष्ट्रीय कृषि आयात निर्यात परिषद नाम की संस्था को  भारत सरकार का उपक्रम बताकर बेरोजगारों को नौकरी देने का झांसा देकर करोड़ों रुपये की ठगी करने वालों का बरेली में भी पांव जमाए थे। लखनऊ की क्राइम ब्रांच की टीम ने इंदिरानगर के आम्रपाली बाजार के पास एक मकान से  काशीनाथ तिवारी और संदीप कुमार सिंह के पकड़ा तो पूरा नेटवर्क सतर्क हो गया। बरेली से भी उनके गुर्गे गायब हो गए हैं। बरेली क्राइम ब्रांच को ठगों के ठिकानोें पर कोई नहीं मिला।
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लखनऊ से संचालित इस गैंग ने  बरेली में पहले सिविल लाइंस में और फिर  यूनिवर्सिटी के सामने ऑफिस खोला था। नेताओं को कार्यक्रम में बुलाकर उनके साथ फोटो खिंचवाने के बाद वह उन्हें दिखाकर बेरोजगारों को अपने जाल में फंसाकर लखनऊ भेजते थे। लखनऊ से जानकारी मिलने पर क्राइम ब्रांच ने ठगों के बारे में डाटा जुटाया। दोनों स्थानों पर संस्था के  ठगों की तलाश कराई गई, लेकिन नए ऑफिस का पता नहीं लग पाया। लखनऊ के एसपी क्राइम ज्ञान प्रकाश चतुर्वेदी ने बताया कि ठगों ने पूर्व प्रधानमंत्री अटल विहारी वाजपेयी और उत्तराखंड के मुख्यमंत्री हरीश रावत समेत कई कद्दावर नेताओं के साथ फोटो खिंचवाकर अपने ऑफिस में लगा रखे हैं। उत्तराखंड के मुख्यमंत्री को तो कई कार्यक्रमों में उन्होंने मुख्य अतिथि बनाया है।

ठगों का गढ़ है रूहेलखंड
बरेली। रूहेलखंड तो ठगों का गढ़ है। यहां हर किस्म की ठगी हो रही है। नाइजीरिया तक के ठगों ने इस इलाके के लोगों से लॉटरी के नाम पर करोेड़ों रुपये ठग लिए। टावर लगवाने के नाम पर भी यहां के लोग लाखों रुपये गवां चुके हैं। बरेली के अच्छे से अच्छे लोगों से एटीएम का कोड नंबर पूछकर ठग उनके खाते खाली कर रहे हैं। विदेश में नौकरी दिलानेे के नाम पर ठगी करने वाले गैंग भी यहां सक्रिय हैं।
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 केस-वन
टावर वाले ठग
टावर के नाम पर ठगी करने के आरोपी हरविंदर ने पुलिस को बताया था कि उसनेे 64 कॉल सेंटर खोलकर ठगी का कारोबार शुरू किया। एक कॉल सेंटर पर करीब 10 से 15 लोग रहते थे और हर रोज सभी कॉल सेंटरों के माध्यम से 150 से 200 रोेजाना एक्सिस वैल्यू कार्ड प्राइवेट लिमिटेड के नाम से आते थे। जिस कॉल सेंटर से अधिक राशि के चेक आते थे, उसके लाभ का हिस्सा बढ़ जाता था। उसके एक एकाउंट में करीब 12 करोड़ व दूसरे में करीब 14 करोड़ रुपये का लेन-देन का हिसाब है। लालच देकर लोगों को टावर लगाने के लिए फंसाया जाता था।
केस-दो
लॉटरी के चक्कर में फंस गए
-प्रेमनगर इलाके के रहनेे वाले ओएनजीसी के रिटायर्ड अधिकारी रामचंद्र को 16 सितंबर को एरीजोना कंपनी का ईमेल मैसेज में बताया गया था कि उनकी दो मिलियन डॉलर की लॉटरी निकली है। रकम लेने के लिए उनसे नाम-पता और मोबाइल नंबर भेजने को कहा गया था। रामचंद्र ने अपना नाम-पता मेल कर दिया। इसके बाद दूसरे मेल में उन्हें एक एकाउंट नंबर देते हुए उसमें कस्टम चार्ज के तौर पर 25 हजार रुपये जमा करने को कहा गया। 19 सितंबर को रामचंद्र ने एकाउंट में रकम जमा कर दी। फिर रिजर्व बैंक ड्यूटी के नाम पर 25 हजार और मांगे गए। यह भी उन्होंने एकाउंट में जमा कर दिए। ठग रकम पहुंचाने के बहाने बरेली पहुंचे और रामचंद्र से एक लाख और मांगने लगे। तभी रामचंद्र ने पुलिस को सूचना देकर उन्हें पकड़वा दिया था।
केस-तीन
हाईस्कूल फेल ने खोली थी फर्जी कंपनी
-शाहजहांपुर के क टरी इलाके के थाना गढ़िया रंगीन के मुरेना गांव के विविध कुमार नेे एसएफसी प्राइवेट लिमिटेड कंपनी की बेबसाइट बनवाकर फाइनेंस कराने के नाम पर लोगों से लाखों रुपये की ठगी कर ली। फाइल बनवाने के नाम पर वह लोगों से पैसा लेकर हड़प जाते थे। इसके लिए समाचार पत्रों में विज्ञापन भी छपवाते थे। शिकायत मिलने पर क्राइम ब्रांच ने विविध कुमार के साथ सुभाषनगर के रहने वाले सुमित गांधी, और प्रेमगुप्ता को गिरफ्तार करके इसी साल जेल भेजा है।
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