शिक्षकों में असमंजस का माहौल
जिला महामंत्री ने कहा कि संगठन सर्वोच्च न्यायालय की ओर से 29 मई 2026 को पुनर्विचार याचिकाओं पर दिए गए निर्णय का पूर्ण सम्मान करता है, लेकिन इसके साथ ही यह भी अपेक्षा करता है कि संसद एवं केंद्र सरकार इन शिक्षकों के सेवा हितों की रक्षा के लिए आवश्यक नीतिगत कदम उठाए, ताकि लाखों शिक्षकों तथा उनके परिवारों में फैला असमंजस और असुरक्षा का माहौल खत्म हो सके।
जिला संगठन मंत्री सत्यार्थ पाराशरी ने मांग दोहराते हुए कहा कि पूर्व नियुक्त शिक्षकों को टीईटी की अनिवार्यता से स्थायी राहत दी जाए और उनकी सेवा, वरिष्ठता, पदोन्नति एवं अन्य सभी सेवा लाभों को पूर्ण संरक्षण प्रदान किया जाए। इसके लिए यदि आवश्यकता हो तो संसद में आरटीई अधिनियम में आवश्यक विधायी संशोधन या विशेष प्रावधान लाया जाना चाहिए।
जल्द जारी किए जाएं स्पष्ट दिशा-निर्देश
शिक्षकों के अधिकारों की वकालत करते हुए जिला कोषाध्यक्ष परीक्षित गंगवार ने कहा कि दशकों से अपनी सेवाएं दे रहे शिक्षकों के अनुभव, कार्यकुशलता और उनके योगदान को ध्यान में रखना बेहद जरूरी है। उनके सेवा-अधिकारों की रक्षा करना पूरी तरह से न्याय, समानता एवं विधिक निश्चितता के सिद्धांतों के अनुरूप होगा। राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ जनपद बरेली ने केंद्र सरकार से यह अनुरोध किया है कि सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को इस संबंध में जल्द से जल्द स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि शिक्षकों के बीच व्याप्त अनिश्चितता की स्थिति का शीघ्र समाधान हो सके।