फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Sports News: बरेली के स्पोर्ट्स स्टेडियम में एस्ट्रो टर्फ नहीं, घास पर हो रहा हॉकी का अभ्यास

Fri, 14 Feb 2025 01:18 PM IST
मुकेश कुमार संवाद न्यूज एजेंसी, बरेली

सार

स्टेडियम में अभ्यास करने वाले हॉकी खिलाड़ियों ने एस्ट्रो टर्फ के बिना अभ्यास को अधूरा बताया। कहा कि संसाधनों के अभाव में प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर पाना कठिन हो जाता है।
विज्ञापन
मैदान में अभ्यास करते हॉकी के खिलाड़ी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

बरेली के स्पोर्ट्स स्टेडियम में एस्ट्रो टर्फ की सुविधा न होने के कारण खिलाड़ी घास के मैदान पर अभ्यास करने के लिए मजबूर हैं। इससे तकनीकी दक्षता के साथ-साथ प्रतियोगिताओं में उनका प्रदर्शन भी प्रभावित हो रहा है। 

विज्ञापन


सभी प्रदेश स्तरीय और राष्ट्र स्तरीय प्रतियोगिताएं एस्ट्रो टर्फ पर ही खेली जाती हैं। घास के मैदान की तुलना में एस्ट्रो टर्फ पर गेंद का मूवमेंट अलग होता है। प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन के लिए खिलाड़ियों को एस्ट्रो टर्फ पर नियमित अभ्यास की आवश्यकता होती है। स्टेडियम में इसकी सुविधा उपलब्ध नहीं होने से उनका खेल प्रभावित हो रहा है। 

खिलाड़ियों ने एस्ट्रो टर्फ के बिना अभ्यास को अधूरा बताया। कहा कि संसाधनों के अभाव में प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन कर पाना कठिन हो जाता है। घास के मैदान पर खेलने के बाद एस्ट्रो टर्फ पर गेंद की गति का अनुमान लगाने में परेशानी होती है। हॉकी के एक कोच ने बताया कि एस्ट्रो टर्फ पर खेलने और घास के मैदान पर खेलने में जमीन-आसमान का फर्क होता है। एस्ट्रो टर्फ के बिना खिलाड़ी अपने तकनीकी कौशल को निखार नहीं पाते। इसका असर उनके प्रदर्शन पर पड़ता है। 

विज्ञापन
Trending Videos
विज्ञापन

बरसात में बढ़ जाती हैं मुश्किलें
बरसात के मौसम में खिलाड़ियों की समस्याएं बढ़ जाती हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, गीली घास पर बॉल धीमी हो जाती है और फिसलन बढ़ जाती है। इससे खिलाड़ियों के चोटिल होने का भी खतरा रहता है। एस्ट्रो टर्फ पर बारिश के बाद भी खेल जारी रखा जा सकता है, लेकिन घास के मैदान पर ऐसा संभव नहीं। 

जानिए, क्या होता है एस्ट्रो टर्फ
एस्ट्रो टर्फ कृत्रिम घास का मैदान होता है, जिस पर हॉकी खेली जाती है। कृत्रिम घास गेंद को मूवमेंट प्रदान करती है। इस पर खेलने से खिलाड़ियों के चोटिल होने का खतरा भी कम हो जाता है।

आरएसओ जितेंद्र यादव ने बताया कि सारे मैदान मानक के अनुरूप होने चाहिए। स्टेडियम में एस्ट्रो टर्फ के लिए जगह की कमी है। अगर जगह उपलब्ध हो तो हॉकी के लिए एस्ट्रो टर्फ बनाया जा सकता है। 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें