बरेली। खिलाड़ियों की सेहत से बेपरवाह अफसर आखिरकार जाग गए। उन्होंने स्टेडियम में फिजियोथेेरेपिस्ट और डायटीशियन की तैनाती के लिए सीएमओ को पत्र लिखा है। इसके बाद संभावना जताई जा रही है कि करीब 46 सालों बाद एक बार फिर स्टेडियम में डॉक्टर की तैनाती की जा सकती है।
खेल निदेशालय के मानकों के अनुसार प्रत्येक स्टेडियम में फिजियोथेरेपिस्ट और फर्स्ट एड की व्यवस्था होनी अनिवार्य है। पिछले 46 सालों से स्टेडियम में डॉक्टर की तैनाती न होने से खिलाड़ियों को खेल के दौरान चोट आदि लगने पर उन्हेें निजी अस्पतालों से इलाज कराना पड़ता था। ऐसे में दूर-दराज से आए खिलाड़ियों को भागदौड़ करनी पड़ती थी, जिसमें काफी पैसा भी खर्च हो जाता था। इस मामले में कई बार खिलाड़ियों ने आवाज भी उठाई, लेकिन कोेई सुनवाई नहीं हुई। पिछले दिनों अमर उजाला ने ‘स्पोर्ट्स स्टेडियम में खिलाड़ियों की सेहत से खिलवाड़’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की तो अफसरों में खलबली मच गई। आनन-फानन में उन्होंने सीएमओ को पत्र लिखकर अस्पताल से अथवा किसी अन्य फिजियोथेरेपिस्ट की संविदा पर तैनाती कराने को पत्र लिखा है। इसमें उन्होंने खेल निदेशालय के निर्देशों की जानकारी भी दी है।
सीएमओ को लिखे पत्र में आरएसओ विजय कुमार ने शासनादेश के तहत खिलाड़ियों को खेल के लिए संतुलित आहार की जानकारी देेने के लिए डायटीशियन की भी मांग की है। उन्होंने डायटीशियन के लिए सीएमओ से प्रतिमाह न्यूनतम वेतन की दर पर प्रस्ताव भेजने को कहा है। आरएसओ के मुताबिक स्टेडियम में लंबे समय तक शासनादेश का उल्लंघन किया गया। खिलाड़ियों को सेहतमंद बनाने में अगर सीएमओ की ओर से डॉक्टर तैनात नहीं किया गया तो अन्य निजी अस्पतालों से भी फिजियोथेरेपिस्ट की तैनाती के बाबत प्रस्ताव मांगा जाएगा।