स्मार्ट सिटी काउंट डाउन- 3
स्मार्ट सिटी की सूची में शामिल होने का बरेली के पास इस बार आखिरी मौका है। लाइन में 48 शहर हैं जिन्होंने स्मार्ट सिटी में शामिल होने का दावा किया है। बरेली का प्रोजेक्ट इस बार भी दारा शॉ एजेंसी ने तैयार किया है। इसमें राजस्व को बढ़ाने पर ध्यान दिया गया है साथ ही हैंडीक्रॉफ्ट के हिसाब से भी बरेली को प्रसिद्ध करने का प्लान है। हालांकि इनमें से एक भी प्लान पर बरेली में कोई काम हो रहा है। राजस्व बटोरने की हालत पतली है और हैंडीक्रॉफ्ट कारोबार मरने की कगार पर पहुंच चुका है। 23 जून को स्मार्ट सिटी की फाइनल सूची सामने आएगी।
दारा शॉ एजेंसी ने रेट्रो फिटिंग के लिए शहर में सिविल लाइंस का हिस्सा चुना है। यहीं बड़े स्तर पर बदलाव किए जाएंगे और विकास होगा। क्याेंकि इस क्षेत्र में शहर के डवलप होने की संभावना अधिक है। तीसरी सूची में बरेली के शामिल न होने के बाद एजेंसी ने दोबारा से मंत्रणा की तो राजस्व की कम वसूली और ऊ र्जा की बचत पर ध्यान न देना बड़ा कारण सामने आया। लखनऊ स्थित रीजनल सेंटर फॉर अर्बन एंड इनवायरमेंटल स्टडीज (आरसीयूईएस) में भी कमियाें को सुधारने पर बल दिया। इसके बाद प्रोजेक्ट शहरी विकास मंत्रालय में जमा किया गया है।
- नए प्रस्ताव में इस पर ध्यान
राजस्व बढ़ाना
पुराने बस स्टैंड की जगह
ई- हेल्थ पर जोर
हैंडीक्रॉफ्ट में आर्थिक सुधार
यातायात व्यवस्था
ऊर्जा की बचत
शहर को आर्थिक रूप से मजबूत करना
48 में से 40 शहर इस बार स्मार्ट सिटी में शामिल होंगे। उम्मीद है कि बरेली इस बार जरूर शामिल होगा। रेट्रोफिटिंग प्रोजेक्ट के साथ ही नए प्रस्ताव में कुछ प्रमुख चीजों पर ध्यान दिया गया है। हमारा प्रोजेक्ट अच्छा बना है।
कौस्तुभ, प्रतिनिधि, दारा शॉ एजेंसी
दावा और हकीकत
दावा है कि अतिक्रमण करने वाले दुकानदाराें को कर के दायरे में लाया जाएगा। इनको जमीन दी जाएगी जहां ये व्यापार करेंगे। लेकिन अभी तक फेरी नीति ही तय नहीं हो पाई है। अतिक्रमण हटाने का अभियान कागजों पर खूब चला।
हकीकत- अतिक्रमण
नगर निगम अभी तक अतिक्रमण को लेकर कोई काम नहीं कर सका है। जिस सिविल लाइंस क्षेत्र को रेट्रोफिटिंग के लिए चुना गया है वह अतिक्रमण से पटा पड़ा है। चौकी चौराहे से अगर आप अयूब खां चौराहे तक जाएंगे तो आपको सड़क के किनारे अतिक्रमण दिखेगा। व्यवसायिक कर देने वाले दुकानदार अपनी दुकान छोड़कर सड़क के फुटपाथ पर उत्पाद को सजाएं हुए हैं। कई बार अतिक्रमण हटाने के बाद भी इन्हें शर्म महसूस नहीं होती है। बेशर्मी का आलम ये है कि जैसे ही अतिक्रमण दस्ता यहां से निकल जाता है इनकी दुकान फिर सड़क पर आ जाती है। इसी तरह अयूब खां चौराहे से चौपुला तक अतिक्रमण ही अतिक्रमण है। नावल्टी बाजार से कुतुबखाना तक अतिक्रमण की वजह से लोग चल नहीं पाते हैं।
दावा
सिविल लाइंस क्षेत्र में मल्टीलेवल पार्किंग का प्रस्ताव है। यहां अतिक्रमण हटाया जाना है ताकि पाथ वे बन सके। रोड के किनारे सुंदरीकरण होगा। सीतापुर आंख अस्पताल के पास कॉम्पलेक्स बनेगा।
हकीकत- अवैध पार्किंग
अवैध पार्किंग की स्थिति ये है कि पूरी सड़क पर लोगों ने खूंटा लगाकर पार्किंग स्टैंड बना लिया है। सिविल लाइंस स्थित सेलेक्शन प्वाइंट के ठीक सामने लोगों ने ‘नो पार्किंग’ के बोर्ड तक हटा दिए हैं। जिस बोर्ड पर नो पार्किंग लिखा था उसको पेंट कर दिया गया है। अब यहां धड़ल्ले से कार खड़ी होती हैं। मोती पार्क में पार्किंग स्टैंड बनाया गया है लेकिन यहां 50 रुपये कार से लेते हैं इसलिए यहां लोग कार नहीं खड़ी करते। कुतुबखाना चौकी पर लोगों ने अवैध पार्किंग बना रखी है। अयूब खां चौराहे से चौपुला तक दुकानों के बाहर भी पार्किंग स्टैंड बनाया गया है लेकिन यहां वाहन बेतरतीब खड़े होते हैं।
दावा
कूड़े के निस्तारण और उसके उठान के लिए डोर टू डोर कलेक्शन शुरू किया गया। दुकान और आवास से कूड़ा लिया जाता है। स्मार्ट सिटी में शामिल होने के लिए कूड़े निस्तारण और उसको रिसाइकिल भी करना है। लेकिन बरेली में स्थिति खराब है।
हकीकत- कूड़ा
कूड़ा तो शहर में कहीं भी पड़ा मिल जाएगा। बटलर प्लाजा में सफाई कर्मी सुबह झाडू़ लगाते हैं लेकिन इसके बाद यहां की हालत दुकानदार और शहर के लोग बिगाड़ते हैं। कहीं भी गुटखा खाकर थूक देते हैं और कूड़ा इधर- उधर फेंकते हैं। शहर की गलियों में लोग कूड़ा फें कते हैं क्योंकि डोर टू डोर कलेक्शन वाले उनके यहां जाते नहीं है या फिर जहां जाते हैं वहां लोग पैसा नहीं देना चाहते। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट अभी तक शुरू नहीं हुआ है। ट्रंचिंग ग्राउंड की जमीन तलाशी जा रही है।