सपा के भोजीपुरा से विधायक शहजिल इस्लाम चुनाव के बाद से ही किसी न किसी मामले को लेकर चर्चा में रहे हैं। प्रदेश में सरकार के गठन के बाद ही शहजिल विपक्ष की आवाज दबाने पर सदन में गोली चलने का बयान देकर चर्चा में आए थे। इसे लेकर सरकार ने उन पर शिकंजा कसा तो वह घर में ही सिमटकर रह गए। अपनी पार्टी से भी दूरी बना ली। अब वह फिर से चर्चा में आए हैं। उनके लखनऊ विधानभवन में हुए राष्ट्रपति चुनाव में एनडीए उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के समर्थन में वोट करने की चर्चाएं प्रबल हैं। हालांकि उन्होंने इस बात को सही करार नहीं किया।
राजनीतिक पंडितों के मुताबिक कुछ माह से विधायक शहजिल इस्लाम बदले-बदले नजर आ रहे हैं। ऐसे में उनकी राजनीतिक आस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। सोमवार को राष्ट्रपति चुनाव के लिए हुई वोटिंग में प्रगतिशील समाजवादी पार्टी (प्रसपा) के प्रमुख शिवपाल सिंह यादव ने एनडीए से राष्ट्रपति पद की उम्मीदवार द्रौपदी मुर्मू के समर्थन में मतदान किया। बताते हैं कि विधायक शहजिल इस्लाम भी वोटिंग के दौरान उन्हीं के खेमे में नजर आए। चर्चाएं हैं कि उन्होंने भी एनडीए प्रत्याशी के ही समर्थन में वोट किया है। यह खबर सपा के राष्ट्रीय नेतृत्व से लेकर जिला स्तरीय पदाधिकारियों तक पहुंची। जिले में कई पूर्व पदाधिकारी चर्चाएं कर रहे हें कि यह संभव भी हो सकता है। तर्क दे रहे हैं कि शहजिल काफी समय से पार्टी की कई गतिविधियों से दूरी बनाए हैं।
विधानमंडल की बैठक में भी अलग-थलग दिखे
मई माह में लखनऊ में सपा के पदाधिकारियों की बैठक बुलाई गई थी, जिसमें विधायक शहजिल इस्लाम नहीं पहुंचे। उसी दिन वह सपा के वरिष्ठ नेता आजम खां से रामपुर मिलने पहुंचे थे। इसी तरह एक माह पहले हुई विधानमंडल की पहली बैठक में समाजवादी पार्टी के नेताओं ने महंगाई से लेकर कई मुद्दों पर सरकार को घेरा। इस दौरान भी शहजिल इस्लाम सपा के वरिष्ठ नेता आजम खां के विधायक बेटे अब्दुल्ला आजम के साथ खड़े नजर आए। चर्चा थी कि उन्होंने लाल टोपी भी नहीं लगाई थी। कुछ दिनों बाद उन्होंने मेरठ क्षेत्र के विधायकों के जरिये
सीएम से भी भेंट की। हालांकि इसे एक औपचारिक भेंट माना गया। इस पर भी उनकी राजनीतिक आस्था पर सवाल खड़े हुए।
यहां से शुरू हुई बुलडोजर की कहानी
छह अप्रैल को सदन में गोली चलने संबंधी बयान देकर विधायक शहजिल इस्लाम निशाने पर आ गए। सात अप्रैल को बरेली विकास प्राधिकरण ने उनके पेट्रोल पंप पर बुलडोजर चला दिया। सपा के राष्ट्रीय नेतृत्व ने 11 सदस्यीय जांच कमेटी बरेली भेजी लेकिन इस कमेटी को शहजिल इस्लाम बयान देने तक नहीं आए जबकि वह उसी दिन शाम को एक रोजा इफ्तार पार्टी में नजर आए। चर्चा है कि यहीं से शहजिल इस्लाम की राजनीतिक आस्था डोलने लगी।
राष्ट्रपति चुनाव के लिए वोटिंग गोपनीय होती है। इसका पता नहीं लगाया जा सकता और न ही किसी को पता लगता। मोबाइल आदि भी नहीं ले जाए जा सकते। मैंने सपा के राष्ट्रीय नेतृत्व की योजना के मुताबिक ही वोटिंग की है। एनडीए प्रत्याशी के समर्थन में वोटिंग करने की एक अफवाह है। यह बात निराधार है।
मेरी राजनीतिक आस्था पूरी तरह सपा में है।
- शहजिल इस्लाम, भोजीपुरा विधायक
शहजिल इस्लाम सपा के सच्चे सिपाही हैं। पार्टी के टिकट से वह भारी मतों से जीते भी हैं। ऐसे में मुझे नहीं लगता कि वह एनडीए प्रत्याशी के समर्थन में वोट करेंगे। इस पर राष्ट्रीय नेतृत्व ही कुछ अधिक बता पाएगा।
- शिवचरण कश्यप, निवर्तमान जिलाध्यक्ष सपा