आवासीय योजनाएं होंगी विकसित
आर्काइव की खबर के मुताबिक काउंटर मैग्नेट सिटी योजना में इस रिंगरोड का निर्माण किया जाना था, जिससे एनसीआर में शामिल शहरों पर जनसंख्या दबाव को कम किया जा सके। इस रिंग रोड पर भविष्य की जरूरतों को देखते हुए औद्योगिक और आवासीय योजनाओं को भी विकसित किए जाने का विकल्प रखा गया। पूरा रिंग रोड नहीं बन पाने की वजह इस पूरी परियोजना के लिए फंड नहीं मिल पाना रहा।
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अधिकारियों ने फंड जुटाने के लिए हरसंभव प्रयास किए, लेकिन इस जरूरत को पूरा नहीं किया जा सका। करीब 42 करोड़ रुपये की जरूरत उस समय निर्माण के लिए बाइपास के लिए बताई गई। इस पर टोल लगाकर निर्माण की लागत निकालने का प्रस्ताव भी बना। हालांकि, सरकारी फंड से निर्माण हो जाने के बाद यहां टोल नहीं लगाया गया।
पहले दो लेन बाइपास की बनी योजना
बजट की कमी को देखते हुए इस बाईपास को पहले दो लेन बनाने की योजना भी बनी। इस पर विचार करते हुए राज्य सरकार के फंड से इसे बनाने की तैयारी थी। हालांकि, एनएचएआई के खर्च के लिए तैयार होने के बाद इस चार लेन बनाया गया। इस प्रोजेक्ट को पूरा होने के बाद भविष्य में चौड़ीकरण कर छह लेन तक बनाया जा सकता है।