वहीं, इस मामले को लेकर सपा अध्यक्ष अखिलेश यादव ने सोमवार को योगी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने ट्वीट कर कहा कि यात्रियों पर सैनिटाइजेशन के लिए किए गए केमिकल छिड़काव से कुछ सवाल उठे हैं:
- क्या इसके लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के निर्देश हैं?
- केमिकल से हो रही जलन का क्या इलाज है?
- भीगे लोगों के कपड़े बदलने की क्या व्यवस्था है?
- साथ में भीगे खाने के सामान की क्या वैकल्पिक व्यवस्था है?
सपा अध्यक्ष ने समाचार पत्र की रिपोर्ट के बाद सरकार पर हमला किया, जिसमें कहा गया था कि यह घटना बरेली में हुई थी, जहां सड़क पर बैठे लोगों के एक समूह पर एक तरल छिड़का गया था, समाचार पत्र के लेख में दावा किया गया था कि यह एक रासायनिक था। घटना के बाद, महिलाओं और बच्चों सहित कई प्रवासियों ने अपनी आंखों में जलन की शिकायत भी की।
उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने अपने ट्वीट के साथ समाचार रिपोर्ट को भी टैग किया।
एक ट्वीट में गलती की पुष्टि करते हुए, डीएम नीतीश कुमार ने 'अति-सक्रिय' कर्मियों को इस कृत्य के लिए जिम्मेदार ठहराया और कहा कि अधिकारियों को इसके लिए दोषी माना जा रहा है।
डीएम ने ट्वीट में कहा कि मुख्य चिकित्सा अधिकारी की देखरेख में प्रभावित व्यक्तियों का इलाज किया जा रहा है। बरेली नगर निगम और दमकल विभाग की टीमों को बस की सफाई करने के लिए कहा गया था, लेकिन अधिक सक्रियता के कारण उन्होंने ऐसा किया। संबंधित अधिकारियों और कर्मियों के खिलाफ कार्रवाई करने के आदेश जारी किए गए हैं।